Matric Social Science Subjective Question 2022 | Class 10th Social Science Subjective Model Paper Download 2022

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Class 10th Social Science vvi Subjective Question 2022

इतिहास  लघुउत्तरीय:-  

प्रश्न 1. उन्नीसवीं शताब्दी के राष्ट्रवाद की भावना शताब्दी के प्रथम भाग की भावना से किस प्रकार भिन्न थी?
उत्तर-उन्नीसवीं शताब्दी की अंतिम चौथाई तक राष्ट्रवाद का वह उदारवादी जनतांत्रिक स्वभाव नहीं रह गया था जो शताब्दी के प्रथम भाग में था । यह अब सीमित लक्ष्यों वाला संकीर्ण सिद्धांत बन गया था । इस अवधि में राष्ट्रवादी समूह परस्पर अनुदार होते चले गए और सदैव लड़ाई लिए तैयार रहते थे ।

              इसके साथ ही प्रमुख यूरोपीय शक्तियों ने भी अपने साम्राज्यवादी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अधीनस्थ लोगों की राष्ट्रवादी आकांक्षाओं का इस्तेमाल किया ।

प्रश्न 2. अक्टूबर क्रांति क्या है ?
उत्तर-लेनिन ने बल प्रयोग द्वारा केरेन्सकी सरकार को पलट देने का निश्चय किया। सेना और जनता दोनों ने साथ दिया। 7 नवम्बर 1917 ई० को बोल्शेविकों ने पेट्रोग्राड के रेलवे स्टेशन, बैंक, डाकघर, टेलीफोन केन्द्र, mकचहरी, अन्य सरकारी भवनों पर अधिकार कर लिया।

          करेन्सकी रूस छोड़कर भाग गया। इस प्रकार रूस की महान नवंबर क्रांति (जिसे अक्टूबर क्रांति भी कहते हैं) सम्पन्न हुई। अब शासन की बागडोर लेनिन के हाथों में आ गई।

प्रश्न 3. फ्रांस की औपनिवेशिक योजना का वर्णन करें।
उत्तर-फ्रांस की औपनिवेशिक योजना
(i) फ्रांस के विशाल साम्राज्य को एक यूनियन में बदल दिया जाएगा जिसमें सभी अधीनस्थ उपनिवेश रहेंगे।
(ii) हिंद-चीन इस फ्रांसीसी महासंघ का एक स्वशासित अंग होगा।
(iii) हिंद-चीन के संरक्षित राज्यों एवं कोचीन-चीन को मिलाकर एकसंघ बनाया जाएगा।
(iv) हिंद-चीन संघ की विदेश नीति एवं सैन्य पर फ्रांस का नियंत्रण रहेगा।

प्रश्न 4. ऑल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना क्यों हुई ?
उत्तर-20वीं शताब्दी के आरंभिक काल में भारत में साम्यवादी विचारधारा के अन्तर्गत बम्बई, कलकत्ता, कानपुर, लाहौर, मद्रास आदि जगहों पर साम्यवादी सभाएँ बननी शुरू हो गई थीं। इसके माध्यम से किसानों व मजदूरों के हितों को आगे बढ़ाया गया।

            ऑल इण्डिया ट्रेड यूनियन काँग्रेस (AITUC) की स्थापना 1920 ई० में कांग्रेस पार्टी ने की थी जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय आंदोलन में किसानों और श्रमिकों का सक्रिय सहयोग प्राप्त करना था।

प्रश्न 5. बिहार के किसान आन्दोलन पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर-बिहार के किसान आन्दोलनों में 1917 ई० के चंपारण आन्दोलन का प्रमुख स्थान है । यह आन्दोलन उस व्यवस्था के खिलाफ था जिसमें प्रत्येक किसान को अपने भूमि के 3/20 हिस्से पर नील की खेती करनी होती थी । इस उपज को अत्यन्त कम कीमत पर उनसे ले लिया जाता था । व्यापार के घाटे को किसानों से वसूल किया जाता रहा ।

              लगान भी बढ़ा दी गई । चम्पारण के राजकुमार शुक्ल ने 1916 ई० के लखनऊ अधिवेशन में किसानों की परेशानियों से अवगत कराते हुए महात्मा गांधी को चम्पारण आने को कहा।\ गाँधीजी ने चम्पारण में सत्याग्रह चलाकर किसानों को राहत पहुँचाई ।

प्रश्न6. शहरों के उद्भव में मध्यम वर्ग की भूमिका किस प्रकार की रही?
उत्तर-शहरों के उद्भव में मध्यम वर्ग की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही । एक नए शिक्षित वर्ग का अभ्युदय हुआ, जो विभिन्न देशों में रहकर भी औसतन एक समान आय प्राप्त करने वाले वर्ग के रूप में उभरकर आए एवं बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में स्वीकार किए गए।

             यह विभिन्न रूपों में कार्यरत रहे, जैसे-शिक्षक, वकील, चिकित्सक, इंजीनियर, क्लर्क, एकाउण्टेंट्स परन्तु उनके जीवन मूल्य के आदर्श समान रहे और इनकी आर्थिक स्थिति भी एक वेतनभोगी वर्ग के रूप में उभर कर आयी।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 7 से 8 दीर्घउत्तरीय हैं। इनमें से किसी एक का उत्तर दें । प्रत्येक के लिए 4 अंक निर्धारित है।

प्रश्न 7. राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभाव का वर्णन करें।
उत्तर-राष्ट्रवाद आधुनिक विश्व की राजनीतिक जागृति का प्रतिफल है। यह एक ऐसी भावना है जो किसी विशेष भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहनेवाले लोगों में एकता की वाहक बनती है। राष्ट्रवाद की भावना का बीजारोपण यूरोप में पुनर्जागरण के काल में ही हो चुका था। परन्तु 1789 ई० की फ्रांसीसी क्रांति से यह उन्नत रूप में प्रकट हुई। 19वीं शताब्दी में तो यह उन्नत एवं आक्रामक रूप में सामने आयी।  

                यूरोप में राष्ट्रीयता की भावना के विकास में फ्रांस की राज्य क्रांति तत्पश्चात् नेपोलियन के आक्रमणों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया । फ्रांसीसी क्रांति ने राजनीति को अभिजात्यवर्गीय परिवेश से बाहर कर उसे अखबारों, सड़कों और सर्वसाधारण की वस्तु बना दिया। यूरोप के कई राज्यों में नेपोलियन के अभियानों द्वारा नवयुग का संदेश पहुँचा । नेपोलियन ने जर्मनी और इटली के राज्यों को भौगोलिक नाम की परिधि से बाहर कर उसे वास्तविक एवं राजनीतिक रूपरेखा प्रदान की, जिससे इटली और जर्मनी के एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ। दूसरी तरफ नेपोलियन की नीतियों के कारण फ्रांसीसी प्रभुता और आधिपत्य के विरुद्ध यूरोप में देशभक्तिपूर्ण विक्षोभ भी जगा ।

             राष्ट्रवाद ने न सिर्फ दो बड़े राज्यों के उदय को ही सुनिश्चित नहीं किया बल्कि अन्य यूरोपीय राष्ट्रों में भी इसके कारण राजनीतिक उथल-पुथल शुरू हुए। हंगरी, बोहेमिया तथा यूनान में स्वतंत्रता आंदोलन इसी राष्ट्रवाद का परिणाम था। इसी के प्रभाव ने ओटोमन साम्राज्य के पतन की कहानी को अंतिम रूप दिया। बालकन क्षेत्र में राष्ट्रवाद के प्रसार ने स्लाव जाति को संगठित कर सर्बिया को जन्म दिया । इस प्रकार यूरोप में जन्मी राष्ट्रीयता की भावना ने प्रथमतः यूरोप को एवं अन्ततः पूरे विश्व को प्रभावित किया, जिसके फलस्वरूप यूरोप के राजनीतिक मानचित्र में बदलाव तो आया ही साथ-साथ कई उपनिवेश भी स्वतंत्र हुए।

प्रश्न 8. 19वीं सदी में भारत में प्रेस के विकास को रेखांकित करें।
उत्तर भारत में समाचार पत्रों का उदय 19वीं शताब्दी की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है। भारतीय द्वारा प्रकाशित प्रथम समाचार पत्र 1816 ई० में गंगाधर भट्टाचार्य का साप्ताहिक ‘बंगाल गजट’ था। 1818 ई० में ब्रिटिश व्यापारियों ने जेम्स सिल्क बकिंघम की सेवा प्राप्त की इसने बड़ी योग्यता से कलकत्ता जनरल का सम्पादन करके लॉर्ड हेस्टिंग्स तथा जॉन एडम्स को परेशानी तथा उलझन में डाल दिया ।

           बकिंघम ने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से प्रेस को जनता का प्रतिबिम्ब बनाया । इस प्रेस को आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने जाँच पड़ताल करके समाचार देने तथा नेतृत्व प्रदान करने की ओर प्रवृत्त किया। 1821 ई० में बंगाल में ‘संवाद कौमुदी’ तथा 1822 ई० में फारसी में प्रकाशित ‘मिरातुल’ अखबार के साथ प्रगतिशील राष्ट्रीय प्रवृत्ति के समाचार पत्रों का प्रकाशन आरंभ हुआ। इन समाचार पत्रों के संस्थापक राजा राममोहन राय थे जिन्होंने इन्हें सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन का हथियार भी बनाया। अंग्रेजी में ‘ब्राह्मनिकल’ मैगजीन भी राममोहन राय ने निकाला।

           1822 ई० में बंबई से गुजराती भाषा में ‘दैनिक बंबई’, समाचार निकलने लगा। द्वारिकानाथ टैगोर, प्रसन्न कुमार टैगोर तथा राममोहन राय के प्रयास से 1830 ई० में ‘बंगदत्त’ की स्थापना हुई। 1831 ई० में जामे जमशेद, 1851 ई० में गोफ्तार तथा अखबारे सौदागर का प्रकाशन आरंभ हुआ । अंग्रेजी प्रकाशकों ने भारतीय समाचार पत्रों द्वारा तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक समस्याओं पर विचार विमर्श का स्वागत नहीं किया और प्रेस को प्रतिबंधित करने का कुत्सित प्रयास किया । उन्नीसवीं शताब्दी में अंग्रेजों द्वारा सम्पादित कई समाचार पत्र थे, जिसमें टाइम्स ऑफ इण्डिया 1861 ई०, स्टेटमैन 1875 ई०, इंग्लिशमैन कलकत्ता से, मद्रास मेल मद्रास से पायनियर 1865 ई० में इलाहाबाद से और 1876 ई० में सिविल और मिलिस्ट्री गजट लाहौर से प्रकाशित होने लगे थे।

          1858 ई० में ईश्वरचन्द विद्यासागर ने सोमप्रकाश का प्रकाशन साप्ताहिक के रूप में बंगाली में आरंभ किया। कुछ वर्षों बाद हिंदू पैट्रियट को भी विद्यासागर ने ले लिया। 1874-75 ई० के बीच इस पत्र के लंदन में संवाददाता सुरेन्द्रनाथ टैगोर और मनमोहन घोष ने ‘इंडियन मिरर’ का प्रकाशन आरंभ किया । केशवचन्द्र सेन ने ‘सुलभ समाचार’ का बंगला में दैनिक प्रकाशन किया। मोती लाल घोष के संपादन में 1868 ई० से अंग्रेजी बांग्ला साप्ताहिक के रूप में अमृत बाजार पत्रिका का प्रेस के इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान है। कलकत्ता से हिंदी बंगवासी, आर्यावर्त, उचितवक्ता, भारत मित्र आदि का प्रकाशन हुआ।

           1899 ई० में अंग्रेजी मासिक ‘हिंदुस्तान रिव्यू’ की स्थापना सच्चिदानन्द सिन्हा ने की जिसका दृष्टिकोण राजनीतिक था। तिलक ने मराठा और केसरी का संपादन किया।

राजनीति विज्ञान
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 9 से 12 तक लघु उत्तरीय हैं। इनमें से किन्हीं 2 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 2 अंक निर्धारित है।

प्रश्न 9. सत्ता की साझेदारी के लिए युक्तिपरक तर्क का वर्णन करें।
उत्तर-सत्ता का बंटवारा ठीक है क्योंकि इससे विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच टकराव का अंदेशा कम हो जाता है । चूँकि सामाजिक टकराव आगे बढ़कर अक्सर हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का रूप ले लेता है इसलिए सत्ता में हिस्सा दे देना राजनीतिक व्यवस्था के स्थायित्व के लिए अच्छा है । बहुसंख्यक समुदाय की इच्छा को बाकी सभी पर थोपना तात्कालिक तौर पर लाभकारी लग सकता है पर आगे चलकर यह देश की अखंडता के लिए घातक हो सकता है । बहुसंख्यकों का आतंक सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए ही परेशानी पैदा नहीं करता बल्कि अक्सर यह बहुसंख्यकों के लिए भी बर्बादी का कारण बन जाता है ।

प्रश्न 10. दलित पैंथर्स पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर-दलित पैंथर्स महाराष्ट्र के दलितों की सामाजिक-आर्थिक बदलावों से संबंधित है। दलितों ने लम्बे अरसे तक भारतीय समाज में क्रूरतापूर्ण जातिगत अन्याय को भुगता है। इसी क्रम में महाराष्ट्र में दलित हितों की दावेदारी के लिए 1972 ई० में दलित युवाओं का एक संगठन बना जिसे दलित पैंथर्स के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 11. क्या शिक्षा का अभाव लोकतंत्र के लिए चुनौती है ?
उत्तर-हाँ, शिक्षा का अभाव लोकतंत्र के लिए चुनौती है। नागरिक जागरूकता के अभाव में लोकतंत्र सफल नहीं हो सकता है। शिक्षा ही उनके भीतर जागरूकता पैदा कर सकती है।

प्रश्न 12. राजनीतिक दलों के किन्हीं चार दोषों का वर्णन करें।
उत्तर-राजनीतिक दलों के चार दोष इस प्रकार हैं-(i) दलों द्वारा चुनाव के समय झूठे वादे कर जनता को गुमराह किया जाता है । (ii) देश की एकता पर कुठाराघात होता है । (iii) दलों द्वारा जातीयता एवं सांप्रदायिकता को प्रोत्साहित किया जाता है । (iv) अनुशासन एवं ठोस सिद्धांतों का अभाव पाया जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 13 से 14 दीर्घ उत्तरीय हैं। इनमें से किसी एक का उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 4 अंक निर्धारित है।

प्रश्न 13. राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण क्यों कहा जाता है ?
उत्तर-राजनीतिक दल लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में काफी महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं। जनता की विभिन्न समस्याओं के समाधान में राजनीतिक दल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण कहा जाता है। किसी भी शासन-व्यवस्था में किसी भी समस्या पर हजारों लोग अपना विचार रखते हैं। किंतु इन विचारों और दृष्टिकोणों का कोई मतलब नहीं रह जाता है जब तक इन विचारों को किसी दल के विचारों से न जोड़ा जाए ।

          राजनीतिक दल देश के लोगों की भावनाओं एवं विचारों को जोड़ने का कार्य करते हैं। इस दृष्टि से हमारे लिए राजनीतिक दलों की महती आवश्यकता इसके अलावा लोकतंत्र में राजनीतिक दल की आवश्यकता इसलिए भी है कि यदि दल नहीं होगा तो सभी उम्मीदवार निर्दलीय होंगे। उम्मीदवार अपनी नीतियाँ राष्ट्रहित में न बनाकर उस क्षेत्र विशेष के लिए बनाएंगे जिस क्षेत्र से वे चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में देश की एकता और अखण्डता खतरे में पड़ जाएगी।

       इन समस्याओं से बचने के लिए राजनीतिक दल का होना अनिवार्य है। अतः राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण कहा जाता है

प्रश्न 14. बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र के विकास में कहाँ तक सहायक हैं ?
उत्तर-बिहार की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी लोकतंत्र के विकास में सहायक हैं। आज की महिलाएँ राष्ट्र की प्रगति के लिए पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। खेतीबारी से लेकर वायुयान उड़ाने और अंतरिक्ष तक जा रही है। इसके बावजूद वे दोयम दर्जे की शिकार हैं। ग्रामीण महिलाओं के लिए सरकार ने नई पंचायती राज व्यवस्था में 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया है।

            गाँव में आज जो महिलाएँ\पंच और सरपंच चुनी जा रही हैं, उनमें ज्यादातर अपने परिवार के पुरुषों के प्रभाव में काम कर रही हैं। ऐसा देखा जा रहा कि गाँव की पंचायतों, या नगर परिषदों में निर्वाचित महिला मुखिया के स्थान पर उसका पति या पुत्र अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहा है। किंतु इसके बावजूद राजनीति और प्रशासन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से लोकतंत्र के मार्ग में हम एक कदम आगे अवश्य बढ़े हैं

अर्थशास्त्र
लघु उत्तरीय प्रश्न
वश्न संख्या 15 से 18 तक लघु उत्तरीय हैं। इनमें से किन्हीं 2 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक निर्धारित है।
प्रश्न 15. मानव विकास रिपोर्ट क्या है ?
उत्तर-संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रकाशित मानव वकास रिपोर्ट (Human Development Report_HDR) विभिन्न देशों की तुलना लोगों के शैक्षिक स्तर, उनकी स्वास्थ्य स्थिति और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर करती है। मानव विकास सूचकांक HDI के तीन सूचक हैं-
(i) जीवन प्रत्याशा,

(ii) शिक्षा प्राप्ति,

(iii) जीवन स्तर ।
HDI तीनों सूचकांक का औसत होता है। पैमाने पर सभी देशों की HDI दर शून्य से एक होती है।

प्रश्न 16. राष्ट्रीय आय की गणना में होने वाली कठिनाइयों का वर्णन करें।
उत्तर- राष्ट्रीय आय की गणना में होने वाली कठिनाइयाँ निम्नलिखित हैं
(i) आँकड़ों को एकत्र करने में कठिनाई
(ii) दोहरी गणना की संभावना
(iii) मूल्य के मापने में कठिनाई ।

प्रश्न 17. क्रडिट कार्ड (Credit Card) क्या है?
उत्तर-क्रेडिट कार्ड प्लास्टिक मुद्रा का एक रूप है। विश्व में प्रचलित क्रेडिट में टैप, मास्टर कार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस आदि प्रसिद्ध है। क्रेडिट कार्ड के अन्तर्गत ग्राहक की वित्तीय स्थिति को देखते हुए बैंक उसकी साख की एक राशि निर्धारित कर देती है जिसके अन्तर्गत वह अपने क्रेडिट कार्ड के माध्यम से निर्धारित धनराशि के अन्दर वस्तुओं और सेवाओं को खरीद सकता है।

प्रश्न 18. बहुराष्ट्रीय कंपनी किसको कहते हैं ?
उत्तर-बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नयंत्रण व स्वामित्व रखती है, जैसे–फोर्ड मोटर्स, सैमसंग, कोकाकोला, नोकिया आदि । बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन लागत में कमी करने एवं अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से उन जगहों या देशों में उत्पादन के लिए कारखाने स्थापित करती है जहाँ उन्हें सस्ता श्रम, सस्ता कच्चा माल एवं अन्य संसाधन मल सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय 19 से 20 दीर्घउत्तरीय हैं। इनमें से किसी एक का उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 4 अंक निर्धारित है।

प्रश्न 19. राष्ट्रीय आय की परिभाषा दें। इसकी गणना की प्रमुख विधि कौन-कौन सी है?
उत्तर-राष्ट्रीय आय का मतलब किसी देश में एक वर्ष में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से लगाया जाता है। दूसरे शब्दों में वर्ष भर में किसी देश में अर्जित आय की कुल मात्रा को राष्ट्रीय आय कहा जाता है। प्रो० अल्फ्रेड मार्शल के अनुसार, “किसी देश की श्रम एवं पूँजी का उसके प्राकृतिक साधनों पर प्रयोग करने से प्रतिवर्ष भौतिक तथा अभौतिक वस्तुओं पर विभिन्न प्रकार की सेवाओं का जो शुद्ध समूह उत्पन्न होता है उसे राष्ट्रीय आय कहते हैं।” प्रो० पीगू के अनुसार, “राष्ट्रीय लाभांश किसी समाज की वस्तुनिष्ठ अथवा भौतिक आय का वह भाग है

          जिसमें विदेशों से प्राप्त आय भी सम्मिलित होती है और जिसकी मुद्रा के रूप में माप हो सकती है।” प्रो० फिशर के अनुसार, “वास्तविक राष्ट्रीय “वास्तविक राष्ट्रीय आय वार्षिक शुद्ध उत्पादन का वह भाग है जिसका उस वर्ष के अन्तर्गत प्रत्यक्ष रूप से उपयोग किया जाता है।” प्रो० कीन्स के अनुसार,  Y=C+I राष्ट्रीय आय = उपभोग व्यय + विनियोग राष्ट्रीय आय की गणना-राष्ट्रीय आय की गणना निम्नलिखित विधि से की जाती है

(i) उत्पादन विधि-राष्ट्र के व्यक्तियों की आय उत्पादन के माध्यम से\ अथवा मौद्रिक आय के माध्यम से प्राप्त होती है, इसलिए उसकी गणना उत्पादन के योग के द्वारा किया जाता है तो उसे उत्पादन गणना विधिm कहते हैं।

(ii) आय विधि-जब राष्ट्र के व्यक्तियों की आय के आधार पर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है तो उस गणना विधि को आय गणना विधि कहते हैं।

(iii) व्यय विधि-प्राप्त की गई आय व्यक्ति अपने उपभोग के लिए व्यय भी करता है। इसलिए राष्ट्रीय आय की गणना लोगों के व्यय के माप से किया जाता है। राष्ट्रीय आय को मापने की इस प्रक्रिया को व्यय गणना विधि कहते हैं  

प्रश्न 20. व्यावसायिक बैंक के प्रमुख कार्यों की विवेचना करें।
उत्तर- व्यावसायिक बैंक के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-
(i) जमा राशि को स्वीकार करना-व्यावसायिक बैंक का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कार्य अपने ग्राहकों से जमा के रूप में मुद्रा प्राप्त करना है। बैंकजमा राशि के आधार पर कर्ज देकर लाभ कमाते हैं।

(ii) ऋण प्रदान करना-व्यावसायिक बैंक का दूसरा मुख्य कार्य लोगों को ऋण प्रदान करना है। बैंक के पास जो रुपया जमा के रूप उसमें से एक निश्चित राशि नकद कोष में रखकर बाकी रुपया बैंक द्वारा दूसरे व्यक्तियों को उधार दे दिया जाता है। ये बैंक प्रायः उत्पादक कार्यों के लिए ऋण देते हैं तथा उचित जमानत की माँग करते हैं। व्यावसायिक बैंक निम्न प्रकार से ऋण प्रदान करते हैं-अभियाचित एवं अल्पकालीन ऋण, नकद साख, अधिविकर्ष, विनिमय बिलों का भुगतान, ऋण एवं अग्रिम ।

(iii) सामान्य उपयोगिता संबंधी कार्य-इसके अतिरिक्त व्यावसायिक बैंक अन्य बहुत से कार्यों को भी सम्पन्न करते हैं जिन्हें सामान्य उपयोगिता संबंधी कार्य कहा जाता है। जैसे-यात्री चेक एवं साख प्रमाण पत्र जारी करना, लॉकर की सुविधा, ATM एवं क्रेडिट कार्ड, सुविधा, व्यापारिक सूचनाएँ एवं आँकड़े एकत्रीकरण आदि ।

(iv) एजेंसी संबंधी कार्य-वर्तमान समय में व्यावसायिक बैंक ग्राहकों की एजेंसी के रूप में सेवा करते हैं। इसके अन्तर्गत चेक, बिल व ड्राफ्ट का संकलन, ब्याज तथा लाभांश का संकलन तथा वितरण, ब्याज, ऋण की किस्त,
बीमें की किस्त का भुगतान, प्रतिभूति का क्रय-विक्रय तथा ड्राफ्ट तथा डाक द्वारा कोष का हस्तांतरण आदि क्रियाएँ करते हैं।

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भूगोल
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न संख्या 21 से 26 तक लघु उत्तरीय हैं। इनमें से किन्हीं 3 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 2 अंक निर्धारित है।

प्रश्न 21. पर्वतीय क्षेत्रों में मृदा अपरदन को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं ?
उत्तर-सीढ़ीदार तथा समोच्च जुताई (Terracing and contour bunding)- पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार तथा समोच्च जुताई मृदा संरक्षण का प्रभावशाली तथा सबसे पुराना तरीका है । पहाड़ी ढलानों को काटकर कई चौड़ी सीढ़ियाँ बना दी जाती हैं । ढाल वाली भूमि पर समोच्च रेखाएँ बना दी जाती हैं।

(ख) वन लगाना (Forestation)- वनों के अधीन क्षेत्र को बढ़ाना मृदा संरक्षण का सबसे बेहतर तरीका है । पेड़ों की कटाई को रोककर नए क्षेत्रों में अधिक-से-अधिक पेड़ लगाने के प्रयत्न करने चाहिए ।
(ग) पशुओं की चराई को सीमित करना (Restricted grazing of animals)- मृदा के अपरदन को रोकने के लिए पशुओं को विभिन्न चारागाहों में ले जाना चाहिए ।

प्रश्न 22. वन्य-जीवों के ह्रास के चार प्रमुख कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-वन्य-जीवों के ह्रास के चार प्रमुख कारक हैं :
(i) वन्य प्रदेश के कटने के कारण लगातार छोटे होते जाने से वन्य जीवों का आवास छोटा होना,
(ii) वन्य जीवों का लगातार शिकार
(iii) कृषि में अनेक रसायनों के प्रयोग ने भी कई वन्य प्राणियों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न कर दिया है।
(iv) प्रदूषण के कारण भी वन एवं वन्यप्राणी का ह्रास हुआ है

प्रश्न 23. मुम्बई हाई तेल उत्पादक क्षेत्र का परिचय दें।
उत्तर-‘मुम्बई हाई’ भारत का सबसे पहला तथा सबसे धनी अपतट वेधन तेल क्षेत्र है । यह अरब सागर में स्थित मुंबई से पश्चिम में 176 कि०मी० दूर स्थित है । यहाँ उथले सागर के पेंदे को बेधकर तेल के कुएँ विकसित किए गए हैं।

प्रश्न 24. कोंकण रेलमार्ग परियोजना का वर्णन करें।
उत्तर-यह देश के पश्चिमी तट के किनारे मुम्बई से मंगलौर तक एक रेलमार्ग बनाने की परियोजना है । इस परियोजना की व्यवस्था कोंकण रेलवे निगम द्वारा की गई है । यहाँ नियमित यात्री रेल सेवा प्रारम्भ की जा चुकी है।

प्रश्न 25. नदी घाटी परियोजनाओं के मुख्य उद्देश्यों को लिखें। उत्तर-नदी घाटी योजनाओं को बहुउद्देश्यीय परियोजना कहा जाता है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं :
(i) बाढ़ पर नियंत्रण
(ii) सिंचाई एवं जल विद्युत के लिए नहरों का विकास
(iii) परिवहन के लिए जलमार्ग का विकास
(iv) जल-कृषि एवं मत्स्य पालन जैसे व्यावसायिक कृषि पक्ष को बढ़ावा देना
(v) पर्यटन के अवसर को विकसित करना
(vi) जल विद्युत विकसित करना
(vii) पेयजल उपलब्ध कराना इत्यादि ।

प्रश्न 26. अभ्रक कहाँ मिलता है ? इसका क्या उपयोग है ?
उत्तर-बिहार में अभ्रक झारखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों-नवादा, बाँका जिलों में पाया जाता हैं । यहाँ का अभ्रक सर्वोत्कृष्ट मस्कोह्वाइट किस्म का है। इसका अधिकांश उपयोग विद्युत कुचालक होने के कारण विद्युत उपकरण निर्माण में होता है । इसके अलावे वस्त्र निर्माण, रंग-रोगन, गुलाल-अबीर, तारपेंटिंग, में भी इसका उपयोग होता है

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न संख्या 27 से 28 दीर्घ उत्तरीय हैं। इनमें से किसी एक का उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 4 अंक निर्धारित है।

प्रश्न 27. धात्विक एवं अधात्विक खनिजों में क्या अंतर है ? तुलना कीजिए।

उत्तर-धात्विक खनिज एवं अधात्विक खनिजों में निम्नलिखित अंतर है
 धात्विक खनिज
1. | इन्हें गलाने पर धातु की प्राप्ति होती है।
2. ये कठोर एवं चमकवाले होते हैं।
3. इन्हें प्रायः आग्नेय चट्टानों से प्राप्त किया जाता है।
4. इसे पीट कर तन्तु निकाले जा सकते हैं।
अधात्विक खनिज
1. इनके प्रगलन से धातु नहीं प्राप्त किया जा सकता है
2. इसमें चमक नहीं होती।
3. ये प्रायः परतदार चट्टानों से प्राप्त किये जाते हैं।
4. इन्हें पीटकर तन्तु नहीं निकाला जा सकता है । ये आघातवर्द्धनीय होते हैं, फलतः चूर-चूर हो जाते हैं।

प्रश्न 28. जल विद्युत उत्पादन हेतु अनुकूल भौगोलिक एवं आर्थिक कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर-जल विद्युत उत्पादन हेतु अनुकूल भौगोलिक कारक :
(i) प्रचुर जल राशि
(ii) नदी मार्ग में ढाल का होना
(iii) जल का तीव्रतम वेग
(iv) प्राकृतिक जल प्रपात इत्यादि ।
आर्थिक कारक:
(i) सघन औद्योगिक आबाद क्षेत्र
(ii) बाजार
(iii) पर्याप्त पूँजी निवेश
(iv) परिवहन के साधन
(v) प्राविधिक ज्ञान
(vi) अन्य ऊर्जा स्रोतों का अभाव ।

आपदा प्रबंधन
लघु उत्तरीय प्रश्न
 प्रश्न संख्या 29 से 32 तक लघु उत्तरीय हैं। इनमें से किन्हीं 3 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 2 अंक निर्धारित है।

प्रश्न 29. बाढ़ नियंत्रण के लिए उपाय बताएँ।
उत्तर-बाढ़ नियंत्रण हेतु निम्न उपायों को अपनाना चाहिए :
(a) नदी तटबंधों को मरम्मत करने का कार्य करना चाहिए ।
(b) नदी तटबंध के ऊपर वृक्षारोपण करना चाहिए ।
(c) सरकार के द्वारा विभिन्न नदियों को आपस में जोड़ने का कार्य किया जाना चाहिए।
(d) सुदूर संवेदन प्रणाली के द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का अध्ययन कर बाँधों का नियमित समय पर जाँच किया जाना चाहिए।

प्रश्न 30. भूकंपीय तरंगों से आप क्या समझते हैं ? प्रमुख भूकंपीय तरंगों के नाम लिखिए।
उत्तर- भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली विभिन्न प्रकार के कंपन को भूकंपीय तरंग कहते हैं। भूकंपीय तरंगों का वेग भिन्न-भिन्न होता है। भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली तरंगें निम्नलिखित हैं :
(a) प्राथमिक तरंग (P)
(b) द्वितीयक तरंग (S)
(c) दीर्घ तरंग (L) 

प्रश्न 31. ‘आपदा से पहले के कुछ घंटे तथा बाद के कुछ घंटे बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं क्यों ?
उत्तर-1. यह समय लोगों की जान बचाने तथा भावी नुकसान को कम करने का होता है।
2. बाहरी सहायता का घटनास्थल तक पहुँचने में समय लग सकता है। ऐसे समय में समुदाय के पेशेवर लोग महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं 

प्रश्न 32. प्राकृतिक आपदा एवं मानवजनित आपदा में अंतर सही उदाहरणों के साथ प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर-प्राकृतिक आपदा एवं मानवनिर्मित आपदा में निम्नांकित अंतर हैं :
(a) प्राकृतिक आपदा-हमारे वातावरण में घटित होने वाली वैसी घटनाएँ जो प्राकृतिक कारणों से उत्पन्न होती हों, प्राकृतिक आपदा कहलाती हैं। जैसे-भूकंप, बाढ़, सूखा, सुनामी, भूस्खलन, चक्रवात ।

(b) मानवनिर्मित आपदा-वैसी घटनाएँ जिसकी उत्पत्ति में मानवीय कारकों का हाथ हो तथा जिसके घटित होने के फलस्वरूप अधिक संख्या में मानवों की मृत्यु एवं संसाधनों की हानि पहुँचती हो, मानवनिर्मित आपदा कहलाती हैं। जैसे-रेल एवं सड़क दुर्घटना, आग, युद्ध, आतंकवाद, महामारी, साम्प्रदायिक दंगे आदि ।

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