परिश्रम का महत्त्व 10th vvi Question 2022

परिश्रम का महत्त्व और बिहार में पूर्ण मद्यनिषेध निबंध

परिश्रम का महत्त्व

भूमिका

परिश्रम ही सफलता की कुञ्जी है। बिना परिश्रम के कुछ भी प्राप्त करना सम्भव नहीं, इसलिए श्रम करना प्रत्येक का कर्तव्य है। इतिहास इसका साक्षी है कि जिन्होंने परिश्रम का महत्त्व नहीं समझा उनका पतन निश्चित रूप से हुआ।

 परिश्रम का महत्त्व श्रम का अर्थ

सृष्टि के सारे जीव परिश्रम के सहारे ही जीते हैं। चींटी से लेकर ज्ञानपुंज-मानव तक अपना जीवन-यापन परिश्रम से ही करते हैं। अतएव परिश्रम का संबल पकड़े रहना सबका धर्म है। किन्तु इस बात का सदा ध्यान रखना चाहिए कि परिश्रम वही है जिससे निर्माण होता है, रचना होती है। नदी किनारे बैठ कर पानी पिटना भी परिश्रम है लेकिन उससे कोई निर्माण नहीं होता, अतः वह परिश्रम की कोटि में नहीं आता।

परिश्रम का महत्त्व  उनति का केन्द्र-बिन्दु

परिश्रम मानव का मुख्य केन्द्र-बिन्दु है। परिश्रम करने वाला ही जीवन संग्राम में सफल होता है, जो छात्र परिश्रम नहीं करता, परीक्षा में असफल होता है। इसी प्रकार, किसान के परिश्रम पर देश का विकास निर्भर करता है तो अमिक के श्रम पर उद्योग। कोई भी देश बिना परिश्रम किए सम्पन्न राष्ट्र कभी भी नहीं कहला सकता। जापान श्रम के फलस्वरूप ही विश्व में उत्तम स्थान रखता है। इसीलिए गाँधी, बिनोवा भावे, जवाहर लाल नेहरू ने देशवासियों को परिश्रम करने का सन्देश दिया। अब्राहम लिंकन, वाशिंगटन, अम्बेदकर, लाल बहादुर शास्त्री आदि परिश्रम के कारण ही यशस्वी पुरुष कहलाये। क्योंकि

                                                                     ‘श्रमेण लभते विद्या, अमेण लभते धनम्।

                                                                     श्रमेण लभते ज्ञानम्, श्रमेण लभते यशम्।’

परिश्रम के लाभ

कुछ लोग परिश्रम की अपेक्षा भाग्य को महत्त्व देते हैं। कहते हैं भाग्य में जो लिखा होता है, वही होता है। किन्तु बिना हाथ हिलाए भोजन भी तो मुंह में नहीं जाता। अतः केवल भाग्य के सहारे बैठना ठीक नहीं है। कहते हैं परिश्रमी पुरुष अपना भाग्य पलट देते हैं।

उपसंहार :- अतः हर व्यक्ति को श्रम करना चाहिए क्योंकि श्रमजीवी ही ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ तथा देशप्रेमी होते हैं। परिश्रमी का स्वास्थ्य भी ठीकरहता है। किन्तु अकर्मण्य अथवा कामचोर, बेईमान, निष्ठुर तथा देशद्रोही होतेहैं। ऐसे व्यक्ति देश, जाति की हानि के सिवाय और कुछ नहीं करते। सिर्फश्रमी या परिश्रमी ही इतिहास के पन्नों पर अपना नाम अमर रखते हैं।

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बिहार में पूर्ण मद्यनिषेध

भूमिका

बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने अपने चुनाव अभियान में शराबबंदी लागू करने का वादा किया था और इस मुद्दे पर उन्हें काफी जन-समर्थन, खासकर महिला वोटरों के बीच मिला था। सरकार बनाने के बाद अब नीतिश कुमार ने अपना वादा पूरी तरह निभा दिया है। एक अप्रैल से बिहार में देशी शराब की बिक्री बंद कर दी गई और योजना के मुताबिक छह महीने बाद पूर्ण शराबबंदी लागू की जानी थी,

लेकिन देशी शराब पर पाबंदी के नतीजों से उत्साहित होकर मुख्यमंत्री ने चार दिन बाद ही अंग्रेजी शराब की बिक्री पर भी पाबंदी लगा दी। अब बिहार में बार और होटलों समेत कहीं भी शराब नहीं मिल पाएगी। भारत में राज्यों के पास राजस्व के जो गिने-चुने स्रोत हैं, उनमें से एक शराब पर लगने वाला आबकारी कर भी है, बल्कि शराब से होने वाली कमाई राज्यों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बिहार में ही सरकार को शराब से 3,300 करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है, अब सरकार की यह कमाई बंद हो जाएगी।

 मद्यपान के प्रभाव

सैद्धांतिक रूप से देखें, तो शराबबंदी से समाज को कई फायदे होते हैं। शराब के खिलाफ तम्बाकू जैसा कोई विश्व-व्यापी अभियान अभी नहीं है। तम्बाकू से कैंसर का इतना सीधा रिश्ता साबित हुआ है कि उसकी वजह से उसके खिलाफ पूरी दुनिया में माहौल बन गया लेकिन कुछ अध्ययनों में नशे के व्यापक नुकसान का आकलन किया गया और उनमें शराब को दुनिया का सबसे नुकसानदेह नशा पाया गया। शराब के सामाजिक असर सबसे ज्यादा नुकसानदेह होते हैं। घर-परिवारों में कलह, टूटन और अपराधों से शराब का सीधा रिश्ता है। सड़क दुर्घटनाओं का एक महत्वपूर्ण कारण शराब है। शराब की वजह से नागरिकों की उत्पादकता व आय में भारी कमी आती है,

जो समाज में गरीबी और बदहाली का एक प्रमुख कारण है। शराब ज्यादातर पुरुष पीते हैं और उनका नुकसान महिलाएँ और बच्चे सबसे ज्यादा उठाते हैं। इसी वजह से जब भी शराबबंदी हुई है, उसके पीछे महिलाओं का आग्रह सबसे ज्यादा प्रबल था। जहाँ शराबबंदी नहीं है, वहाँ भी अक्सर महिलाओं ने शराब के खिलाफ आन्दोलन किए हैं।

उपसंहार

21 जनवरी 2017 को बिहार में मानव श्रृंखला बनी जिसमें 4 करोड़ लोगों ने भाग लिया। यह इस बात का गवाह है कि हमारी बिहार की जनता मद्यपान को अच्छे निगाह से नहीं देखती। अतः हम सभी का पुनित कर्त्तव्य है कि हम मद्यपान से दुर रह कर इसके घातक प्रभावों के बारे में समाज को जागरूक करें।

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