कम्प्यूटर

कम्प्यूटर-आज की आवश्यकता और महात्मा गाँधी निबंध

कम्प्यूटर- आज की आवश्यकता और महात्मा गाँधी निबंध

भूमिका

विज्ञान ने मनुष्य को सुख-सुविधा के जो साधन दिये हैं। उनमें कम्प्यूटर का विशिष्ट स्थान है। कम्प्यूटर से घंटों का काम सेकेंडों में हो जाता है। यही कारण है कि दिन-प्रतिदिन इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। भारत में भी कम्प्यूटर का प्रचलन बड़ी तेजी से बढ़ रहा है।

कम्प्यूटर आविष्कार

चार्ल्स बेवेज पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 19वीं शताब्दी के आरम्भ में सबसे पहला कम्प्यूटर बनाया। इसकी विशेषता यह थी कि यह जटिल गणनाएँ करने तथा उन्हें मुद्रित करने की क्षमता रखता था।  आगे चलकर इसमें और भी विकास हुआ। वस्तुतः कम्प्यूटर द्वारा की जाने वाली गणनाओं के लिए एक विशेष भाषा में निर्देश तैयार किए जाते हैं।

इस निर्देशों और प्रयोगों को ‘कम्प्यूटर का प्रोग्राम’ की संज्ञा दी जाती है। कम्प्यूटर का परिणाम शुद्ध होता है। अशुद्ध उत्तर का उत्तरदायित्व कम्प्यूटर पर नहीं बल्कि उसके प्रयोक्ता पर है।

कम्प्यूटर विविध कार्य

कम्प्यूटर क्या है? वस्तुतः ऐसे यान्त्रिक मस्तिष्कों का रूपात्मक तथा समन्वयात्मक योग तथा गुणात्मक घनत्व है, जो तीव्रतम गति से न्यूनतम समय में अधिक-से-अधिक काम कर सकता है। गणना के क्षेत्र में इसका विशेष महत्त्व है। इस क्षेत्र में यह लाजवाब है। आज कम्प्यूटर सिर्फ गणना के क्षेत्र में ही नहीं, समाचार-पत्रों तथा पुस्तकों के प्रकाशन में भी अपनी विशेष भूमिका निभा रहा है। कम्प्यूटर से संचालित फोटो कम्पोजिंग मशीन के माध्यम से छपने वाली सामग्री को टकित किया जा सकता है। टंकित होने वाले मैटर को कम्प्यूटर के पर्दे पर देखा जा सकता है और आसानी से अशुद्धियाँ दूर की जा सकती हैं। कम्प्यूटर संचार का भी एक महत्त्वपूर्ण साधन है।

‘कम्प्यूटर नेटवर्क’ के माध्यम से देश के प्रमुख नगरों को एक-दूसरे के साथ जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है। आधुनिक कम्प्यूटर डिजाइन तैयार करने में भी सहायक हो रहा है। भवनों, मोटरगाड़ियों, हवाई जहाजों आदि के डिजाइन तैयार करने में ‘कम्प्यूटर ग्राफिक’ का व्यापक प्रयोग हो रहा है। वस्तुत: कम्प्यूटर में एक कलाकार की भूमिका का निर्वाह करने की भी क्षमता है। अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कम्प्यूटर ने अपना अद्भुत कमाल दिखाया है। इसके माध्यम से अन्तरिक्ष के व्यापक चित्र उतारे जा रहे हैं। इ

न चित्रों का विश्लेषण भी कम्प्यूटर के माध्यम से ही किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में, युद्ध के क्षेत्र में तथा अन्य अनेक क्षेत्रों में कम्प्यूटर का प्रयोग किया जा सकता है। इसका प्रयोग परीक्षाफल के निर्माण में, अन्तरिक्ष यात्रा में, मौसम सम्बन्धी जानकारी में, चिकित्सा में तथा चुनाव-कार्य में भी किया जा रहा है और सफलता मिल रही है।

कम्प्यूटर उपसंहार

यद्यपि भारत में बैंकों एवं कारोबारी क्षेत्रों में कम्प्यूटर अपनी जगह बना चुका है फिर भी विकसित देशों की तुलना में अभी आरम्भिक अवस्था में है। इसकी उपयोगिता निर्विवाद है पर मनुष्य को एकसीमा तक ही प्रयोग में लाना चाहिए। मनुष्य स्वयं निष्क्रिय न बने बल्कि वह स्वयं को सक्रिय बनाए रखे तथा अपनी क्षमता को सुरक्षित रखे।

दूरदर्शन (टेलीविजन) और सदाचार निबंध

महात्मा गाँधी

प्रस्तावना

सत्य एवं अहिंसा के पुजारी, त्याग एवं सहनशीलता की मूर्ति महात्मा गाँधी विश्व की महान् विभूति थे, जिन्हें संसार कभी भी भूल नहीं सकता। पीड़ितों एवं दलितों के उद्धारक महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात प्रांत के काठियावाड़ के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। उनके पिता करमचंद पोरबंदर राज्य के प्रधानमंत्री थे और उनकी माता ‘पुतली बाई’ एक उच्चकोटि की धार्मिक महिला थी। ‘गाँधी’ उनकी वंशगत उपाधि थी। महात्मा गाँधी ने राष्ट्र की प्रत्येक संतान को बाप की दृष्टि से देखा—इसलिए वे ‘बापू’ कहलाये। भारतवासी उन्हें ‘राष्ट्रपिता’ शब्द से संबोधित किया।

शिक्षा

राजकोट से मैट्रिक की परीक्षा पास कर गाँधीजी ने लंदन से बैरिस्टरी की परीक्षा पास की। भारत आने पर उन्होंने बंबई में बैरिस्टरी आरंभ की। एक व्यापारी के मुकदमे के संबंध में वे दक्षिण अफ्रिका गये। वहाँ यूरोपियनों द्वारा भारतीयों पर अत्याचार एवं अन्याय को देखकर उनका हृदय काँप उठा। घोर यातनाओं एवं उत्पीड़न के बीच उन्होंने भारतीयों के अधिकार के लिए संघर्ष आरंभ किया जिसका आधार सत्य एवं अहिंसा था। अंततः अफ्रिकी सरकार को झुकना पड़ा।

राष्ट्रीय आंदोलन में सहभागिता

भारत लौटने पर गाँधीजी ने काँग्रेस के राष्ट्रीय आंदोलन में सरकार के सहयोग के रूप में प्रवेश किया। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘कैसरे-हिन्द’ की उपाधि से विभूषित भी किया। परन्तु, साम्राज्यवादियों के कुकृत्य एवं जालियाँवाला बाग के निर्मम हत्याकांड ने उन्हें सरकार का असहयोगी बना दिया। गाँधीजी ने देश में राष्ट्रीय आंदोलन की विभिन्न बिखरी धाराओं को समेटकर जन-आंदोलन का रूप प्रदान किया तथ  उसे सत्य, अहिंसा एवं सत्याग्रह रूपी शस्त्र से सुसज्जित किया। परिणामतः भारतीय जनमानस में नयी जागृति आयी, अधिकारों के लिए संघर्ष करने की क्षमता उत्पन्न हुई।

इस संदर्भ में गाँधीजी ने 1921 ई० में असहयोग आंदोलन, 1030 ई० में सविनय अवज्ञा आंदोलन तथा 1942 ई. में ‘अंग्रजों! भारत छोड़ो’ आंदोलन प्रारंभ किया। अंत में उन्होंने अपने लक्ष्य की प्राप्ति की और भारत 15 अगस्त, 1947 ई० को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में विश्व के मानचित्र पर आया।

निधन

30 जनवरी, 1948 ई० को जब महात्मा गाँधी दिल्ली में एक प्रार्थना सभा में जा रहे थे, तब एक धर्म-उन्मादी युवक ने गोली मार कर इस महान् विभूति की जीवन-लीला समाप्त कर दी। ‘हे राम’ के साथ ज्ञान का यह महान् दीपक बुझ गया, जिसको दलित एवं पीड़ित अपना उद्धारक तथा मानव-जाति अपना रक्षक समझते थे।

निष्कर्ष

महात्मा गाँधी विश्व-बंधुत्व के पोषक एवं मानवमात्र के हित चिन्तक थे। उनके आदर्श पुरुष थे—श्रीराम, उनका आदर्श राज्य था—राम राज्य, उनकी आदर्श धार्मिक भावना थी—’ईश्वर-अल्ला तेरो नाम, सबको सम्मति दे भगवान।

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