Matric Social science Subjective Question 2022

Matric Social Science Subjective Question 2022 | Bihar Board Social Science Subjective Question 2022 |

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इतिहास  लघुउत्तरीय:-

प्रश्न 1. भूमण्डलीकरण में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के योगदान (भूमिका) को स्पष्ट करें।
उत्तर- भूमण्डलीकरण राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक जीवन के विश्वव्यापी समायोजन की एक प्रक्रिया है जो विश्व के विभिन्न भागों के लोगों को भौतिक व मनोवैज्ञानिक स्तर पर एकीकृत करने का सफल प्रयास करती है। भूमण्डलीकरण की प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियों का महत्त्वपूर्ण योगदान है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने व्यापार, निवेश व तकनीकी प्रवाह द्वारा विश्व के कोने-कोने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। इन कंपनियों के माध्यम से लोगों को जीविकोपार्जन के कई नवीन अवसर प्राप्त हुए हैं

प्रश्न 2. कार्ल मार्क्स के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर- वैज्ञानिक समाजवाद अथवा साम्यवाद के जनक कार्ल मार्क्स थे। वे हीगल, मांटेस्क्यू तथा रूसो के विचारों से गहरे रूप से प्रभावित थे। 1843 ई० में पेरिस में उनकी भेंट फ्रेड्रिक एंजेल्स से हुई । एंजेल्स श्रमिकों की दयनीय स्थिति से दुखी थे । मार्क्स उनके विचारों से प्रभावित हुए । अतः, दोनों ने मिलकर 1848 ई० में कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो प्रकाशित किया ।     

           इसे आधुनिक समाजवाद का जनक माना जाता है । इसमें श्रमिकों को संगठित होने की प्रेरणा दी गई । 1867 ई० में कार्ल मार्क्स ने दास कैपिटल नामक पुस्तक का प्रकाशन किया, जिसे ‘समाजवादियों की बाइबिल’ कहा जाता है ।

        इसके द्वारा उन्होंने साम्यवादी विचारधारा का प्रचार किया । बाद में मार्क्स इंगलैंड चले गए और अपना शेष जीवन वहीं व्यतीत किया । 1883 ई० में उनकी मृत्यु हो गयी । मार्क्स के विचारों का तेजी से प्रसार हुआ । साम्यवाद एक सशक्त आंदोलन
के रूप में परिणत हो गया ।

प्रश्न 3. अमेरिका हिंद-चीन में कैसे घुसा, चर्चा करें। ।
उत्तर- अमेरिका हिंद-चीन में फ्रांस को समर्थन देने के बहाने घुसा और धीरे-धीरे उसने साम्यवादियों के विरोध में हस्तक्षेप की नीति अपनाई। इन्हीं परिस्थितियों में मई 1954 ई० में जेनेवा में हिंद-चीन समस्या पर वार्ता हेतु सम्मेलन बुलाया गया, जिसे जेनेवा समझौते के नाम से जाना जाता है ।

       जेनेवा समझौते ने पूरे वियतनाम को दो हिस्से में बाँट दिया-उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम । उत्तरी वियतनाम में साम्यवाद समर्थित सरकार बनी जबकि दक्षिणी वियतनाम में अमेरिका समर्थित पूँजीवादी सरकार बाओदायी के नेतृत्व में बनी । अमेरिका समर्थित बाओदायी सरकार का संचालन न्यो-दिन्ह-दियम के हाथों में था।

प्रश्न 4. 1929 ई० के आर्थिक संकट के किन्हीं तीन कारणों का संक्षिप्त विवरण दें।
उत्तर- 1929 ई० के आर्थिक संकट का बुनियादी कारण स्वयं इस अर्थव्यवस्था के स्वरूप में समाहित था। प्रथम विश्व युद्ध के चार वर्षों में यूरोप को छोड़कर बाजार आधारित अर्थव्यवस्था का विस्तार होता चला गया, उसके मुनाफे बढ़ते चले गए। दूसरी ओर अधिकांश लोग गरीबी और अभाव में पिसते रहे । नवीन तकनीकी प्रगति और मुनाफे ने उत्पादन में काफी वृद्धि कर दी। किंतु अतिरिक्त उत्पादन के खरीददार बाजार में नहीं थे।

         कृषि में भी अति उत्पादन की समस्या बनी हुई थी। अति उत्पादन के कारण कीमतें काफी गिर गईं जिससे किसानों की आय घट गई । अतः इस स्थिति से निपटने के लिए उन्होंने उत्पादन को और बढ़ाया ताकि कम कीमत पर ज्यादा माल बेचकर अपनी आय स्तर बनाये रख सकें। इससे कीमतें और नीची चली गई जिसने आर्थिक संकट को जन्म दिया। अमेरिका द्वारा यूरोपीय देशों को दिए गए ऋण की वापसी की मांग ने आर्थिक संकट को और गहरा दिया।

प्रश्न 5. अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कैसे हुई ? इसके प्रारम्भिक उद्देश्य क्या थे ?
उत्तर- 1883 ई० के दिसम्बर में इण्डियन एसोसिएशन के सचिव आनन्द मोहन बोस ने कलकत्ता में “नेशनल कांफ्रेंस” नामक एक अखिल भारतीय संगठन का सम्मेलन बुलाया, जिसका उद्देश्य बिखरे राष्ट्रवादी शक्तियों को एकजुट करना था। परंतु दूसरी तरफ एक रिटायर्ड ब्रिटिश अधिकारी ए. ओ. ह्यूम ने भारत में व्याप्त असंतोष को देखते हुए एक सुरक्षा कवच के रूप में कांग्रेस की स्थापना में अपना सहयोग दिया ।

        अन्ततः 28 दिसम्बर, 1885 ई० को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। इस बैठक की अध्यक्षता व्योमेशचन्द्र बनर्जी ने की थी, इसमें कुल 72 सदस्य शामिल हुए थे। इस प्रकार एक अखिल भारतीय राजनीतिक मंच के रूप में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आरंभिक उद्देश्य निम्नलिखित थे :-

(i) भारत के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय हित के काम से जुड़े लोगों के संगठनों के बीच एकता की स्थापना का प्रयास ।
(ii) देशवासियों के बीच भिन्नता और सद्भावना का संबंध स्थापित कर धर्म, वंश, जाति या प्रान्तीय विद्वेष को समाप्त करना।
(iii) राष्ट्रीय एकता के विकास एवं सुदृढ़ीकरण के लिए हर संभव प्रयास करना।
(iv) महत्त्वपूर्ण एवं आवश्यक विषयों के प्रश्नों पर भारत के प्रमुख नागरिकों के बीच चर्चा करना एवं उनके संबंध में प्रमाणों का लेख तैयार करना।
(v) प्रार्थना-पत्रों तथा स्मारपत्रों द्वारा वायसराय एवं उनकी काउन्सिल से सुधार हेतु प्रयास करना ।

प्रश्न 6. वाणिज्यिक क्रांति से क्या समझते हैं ?
उत्तर- आधुनिक काल के उदय के साथ ही भौगोलिक खोजों, पुनर्जागरण तथा राष्ट्रीय राज्यों के उदय जैसी घटनाओं ने वाणिज्यिक क्रांति को जन्म दिया। व्यापार के क्षेत्र में होनेवाला अभूतपूर्व विकास और विस्तार जो जल और स्थल दोनों मार्ग से सम्पूर्ण विश्व तक पहुँचा, इसे वाणिज्यिक क्रांति के नाम से जाना जाता है। इसका केन्द्र यूरोप (इंगलैण्ड) था।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:- 

प्रश्न 7. इटली के एकीकरण में मेजिनी, कावूर और गैरीबाल्डी के योगदान को बतायें।
उत्तर- इटली के एकीकरण में मेजिनी, कावूर और गैरीबाल्डी के निम्नलिखित योगदान थे : 

मेजिनी-  मेजिनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों का समर्थक और योग्य सेनापति था। मेजिनी सम्पूर्ण इटली का एकीकरण कर उसे एक गणराज्य बनाना चाहता था जबकि सार्डिनिया पिडमौंट का शासक चार्ल्स एलबर्ट अपने नेतृत्व में सभी प्रांतों का विलय चाहता था । उधर पोप भी इटली को धर्मराज्य बनाने का पक्षधर था। इस तरह विचारों के टकराव के कारण इटली के एकीकरण का मार्ग अवरुद्ध हो गया था।

           कालांतर में आस्ट्रिया द्वारा इटली के कुछ भागों पर आक्रमण किए जाने लगे जिसमें सार्डिनिया के शासक चार्ल्स एलबर्ट की पराजय हो गयी । आस्ट्रिया के हस्तक्षेप से इटली में जनवादी आंदोलन को कुचल दिया गया। इस प्रकार मेजिनी की पुनः हार हुई और वह पलायन कर गया। 1848 ई० तक इटली के एकीकरण के लिए किए गए प्रयास वस्तुतः असफल ही रहे परंतु धीरे-धीरे इटली में इन आंदोलनों के कारण जनजागरूकता बढ़ रही थी और राष्ट्रीयता की भावना तीव्र हो रही थी।

       इटली में सार्डिनिया-पिडमौंट का नया शासक विक्टर इमैनुएल राष्ट्रवादी विचारधारा का था और उसके प्रयास से इटली के एकीकरण का कार्य जारी रहा। अपनी नीति के क्रियान्वयन के लिए विक्टर ने काउंट कावूर को प्रधानमंत्री नियुक्त किया।

काउंट कावूर- कावूर एक सफल कूटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी था। वह इटली के एकीकरण में सबसे बड़ी बाधा आस्ट्रिया को मानता था । अतः उसने आस्ट्रिया को पराजित करने के लिए फ्रांस के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया । 1953-54 ई० के क्रीमिया युद्ध में कावूर ने फ्रांस की ओर से युद्ध में सम्मिलित होने की घोषणा कर फ्रांस का राजनीतिक समर्थन हासिल किया। कावूर ने नेपोलियन-III से भी एक संधि की जिसके तहत फ्रांस ने आस्ट्रिया के खिलाफ पिडमौण्ट को सैन्य समर्थन देने का वादा किया।

        बदले में नीस और सेवाय नामक दो रियासतें कावूर ने फ्रांस को देना स्वीकार किया । 1860-61 में कावूर ने सिर्फ रोम को छोड़कर उत्तर तथा मध्य इटली की सभी रियासतों (परमा, मोडेना, टसकनी, फब्बारा, बेलाजोना आदि) को मिला लिया तथा जनमत संग्रह कर इसे पुष्ट भी कर लिया। 1862 ई० तक दक्षिण इटली रोम तथा वेनेशिया को छोड़कर बाकी रियासतों का विलय रोम में हो गया और सभी ने विक्टर इमैनुएल को शासक माना ।

गैरीबाल्डी- इसी बीच महान क्रांतिकारी गैरीबाल्डी सशस्त्र क्रांति के द्वारा दक्षिणी इटली के रियासतों के एकीकरण तथा गणतंत्र की स्थापना करने का प्रयास कर रहा था । गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों तथा स्वयंसेवकों की सशस्त्र सेना बनायी। उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किए।

     इन रियासतों की अधिकांश जनता बू| राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गई। गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि  के रूप में वहाँ की सत्ता संभाली । दक्षिणी इटली के जीते हुए क्षेत्र को बिना किसी संधि के गैरीबाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया।

       उसने अपनी सारी सम्पत्ति राष्ट्र को समर्पित कर दी। 1871 ई० तक इटली का एकीकरण मेजिनी, कावूर और गैरीबाल्डी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं के योगदान के कारण पूर्ण हुआ।

प्रश्न 8. मुद्रण क्रांति ने आधुनिक विश्व को कैसे प्रभावित किया ?
उत्तर- छापाखाना की संख्या में वृद्धि के परिणामस्वरूप पुस्तक निर्माण में अप्रत्याशित वृद्धि हुई। 15वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक यूरोपीय बाजारों में लगभग 2 करोड़ मुद्रित किताबें आईं जिनकी संख्या 16वीं सदी तक 20 करोड़ हो गई। इस मुद्रण क्रांति ने आम लोगों की जिंदगी ही बदल दी ।

      आम लोगों का जुड़ाव सूचना, ज्ञान, संस्था और सत्ता से नजदीकी स्तर पर हुआ। जिसके कारण लोक चेतना एवं दृष्टि में बदलाव संभव हुआ। मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप किताबें समाज के सभी तबकों तक पहुँच गईं । किताबों की पहुँच आसान होने से पढ़ने की नई संस्कृति विकसित हुई। एक नया पाठक वर्ग पैदा हुआ। पढ़ने से उनके अंदर तार्किक क्षमता का विकास हुआ।

        इससे तर्कवाद और मानवतावाद का द्वार खुला। धर्म सुधारक मार्टिन लूथर ने कैथोलिक चर्च की कुरीतियों की आलोचना करते हुए अपनी पंचानवें स्थापनाएँ लिखीं। लूथर के लेख आम लोगों में काफी लोकप्रिय हुए । फलस्वरूप चर्च में विभाजन हुआ और प्रोटेस्टेंट धर्म सुधार आंदोलन की शुरुआत हुई। लूथर ने कहा “मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, सबसे बड़ा तोहफा” । इस तरह छपाई ने नए बौद्धिक माहौल का निर्माण किया एवं धर्म सुधार आंदोलन के नए विचारों का फैलाव तीव्र गति से आम लोगों तक फैला।

        18वीं सदी के मध्य तक मुद्रण क्रांति के फलस्वरूप प्रगति और ज्ञानोदय का प्रकाश यूरोप में फैल चुका था । लोगों में निरंकुश सत्ता से लड़ने हेतु नैतिक साहस का संचार होने लगा था। फलस्वरूप मुद्रण संस्कृति ने फ्रांसीसी क्रांति के लिए भी अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण किया । परम्परा पर आधारित सामाजिक व्यवस्था दुर्बल हो गयी। अब लोगों में आलोचनात्मक सवालिया और तार्किक दृष्टिकोण विकसित होने लगी। धर्म और आस्था को तर्क की कसौटी पर कसने से मानवतावादी दृष्टिकोण विकसित हुआ । इस तरह की नई सार्वजनिक दुनिया ने सामाजिक क्रांति को जन्म दिया।

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लघुउत्तरीय:-

प्रश्न 9. भारत में किस तरह जातिगत असमानताएँ हैं ? स्पष्ट करें।
उत्तर- विश्व के सभी समाज में सामाजिक असमानताएँ और श्रम विभाजन पर आधारित समुदाय विद्यमान है। भारत इससे अछूता नहीं है । भारत में भी पेशा का आधार वंशानुगत है । पेशा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्वयमेव चला आता है। पेशे पर आधारित सामुदायिक व्यवस्था ही जाति कहलाती है। यह व्यवस्था जब स्थायी हो जाती है तो श्रम विभाजन का अतिवादी रूप कहलाता है। यह एक खास अर्थ में समाज में दूसरे समुदाय से भिन्न हो जाता है।

       इस प्रकार के वंशानुगत पेशा पर आधारित समुदाय, जिसे हम जाति कहते हैं, की स्वीकृति रीति-रिवाज से हो जाती है। उनकी पहचान एक अलग समुदाय के रूप में होती है और इस समुदाय के सभी व्यक्तियों का एक या मिलता-जुलता पेशा होता है। उनकी बेटे-बेटियों की शादी आपस के समुदाय में ही होती है तथा खान-पान भी समान समुदाय में होता है।

प्रश्न 10. गठबंधन की राजनीति कैसे लोकतंत्र को प्रभावित करती है?
उत्तर- गठबंधन में शामिल राजनीतिक दल अपनी आकांक्षों और लाभों की संभावनाओं के मद्देनजर ही गठबंधन करने के लिए प्रेरित होते हैं, जिससे प्रशासन पर सरकार की पकड़ ढीली पड़ जाती है।

        नई लोकसभा में करोड़पति सांसदों की संख्या अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई है। सभी पार्टियों में आपराधिक छवि वाले सांसदों की संख्या में इजाफा लोकतंत्र के लिए चुनौती है।

प्रश्न 11. आतंकवाद लोकतंत्र की चुनौती है, कैसे?
उत्तर- आतंकवाद देश की एकता और अखण्डता के लिए गंभीर खतरा है। इससे देश में शांति और व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है। इससे अलगाववाद व नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है। इन गतिविधियों से आम लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाता है और लोगों की शांति भंग हो जाती है।

        अतः हम कह सकते हैं कि आतंकवाद लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है

प्रश्न 12. जिला परिषद पर टिप्पणी लिखें।
उत्तर- बिहार में जिला परिषद पंचायती राज व्यवस्था का तीसरा स्तर है। इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। जिले के सभी पंचायत समितियों के प्रमुख इसके सदस्य होते हैं। प्रत्येक जिला परिषद का एक अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष होता है। उनका निर्वाचन जिला परिषद के सदस्य अपने सदस्यों के बीच से पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ और शक्तिशाली बनाने के लिए करते हैं। बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2005 के द्वारा महिलाओं के लिए सम्पूर्ण सीटों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:- 

प्रश्न 13. राजनीतिक पार्टियों तथा दबाव समूहों (Pressuregroups) में सत्ता के बँटवारे की व्यवस्था का वर्णन करें।
उत्तर- (i) लोकतंत्र में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों, दबाव समूहों तथा आंदोलनों के बीच भी सत्ता की साझेदारी होती है ।
(ii) लोकतंत्र नागरिकों को अपना शासन चुनने का विकल्प देता है । यह विकल्प विभिन्न पार्टियों के रूप में उपलब्ध होता है जो जीतने के लिए चुनाव लड़ती हैं । पार्टियों की यह आपसी प्रतिद्वंद्विता ही इस बात को सुनिश्चित कर देती है कि सत्ता एक व्यक्ति या समूह के हाथ में न रहे ।
(iii) एक बड़ी समयावधि पर सत्ता बारी-बारी से अलग-अलग विचारधारा और सामाजिक समूहों वाली पार्टियों के हाथ आती-जाती रहती है । कई बार सत्ता की यह भागीदारी एकदम प्रत्यक्ष दीखती है क्योंकि दो या अधिक पार्टियाँ मिलकर चुनाव लड़ती हैं । यदि इनका चुनाव हो जाता है तो ये गठबंधन सरकार  बनाती हैं तथा सत्ता में साझेदारी होती है ।
(iv) लोकतंत्र में विभिन्न दबाव समूह तथा आंदोलन भी सक्रिय होते हैं।
सरकार की विभिन्न समितियों में सीधी भागीदारी करके या नीतियों पर अपने सदस्य वर्ग के लाभ के लिए दबाव बनाकर ये समूह भी सत्ता में भागीदारी करते हैं।

प्रश्न 14. राजनीतिक दलों के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
उत्तर- (i) चुनाव : दल चुनाव लड़ते हैं । अधिकांश लोकतांत्रिक देशों में चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवारों के बीच लड़ा जात है । राजनीतिक दल उम्मीदवारों का चुनाव कई तरीकों से करते हैं । अमेरिका
जैसे कुछ देशों में उम्मीदवार का चुनाव दल के सदस्य और समर्थक करते हैं। अब इस तरह से उम्मीदवार चुनने वाले देशों की संख्या बढ़ती जा रही है । अन्य देशों, जैसे भारत में, दलों के नेता ही उम्मीदवार चुनते हैं ।

(ii) नीतियों की घोषणा : घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के सामने कुछ सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक मसले होते हैं । राजनीतिक पार्टियाँ अलग-अलग नीतियों और विचारों को मतदाताओं के सामने रखती हैं तथा मसलों के समाधान के उपाय भी सुझाती हैं । अधिकतर पार्टियों के पास उन्हें निर्देश देने के लिए शोध विभाग होते हैं ।

(iii) जनमत निर्माण : राजनीतिक पार्टियाँ लोगों के हितों के मामलों को देश के सामने रखती हैं । वे प्रेस, रेडियो, टेलीविजन तथा नुक्कड़ सभाएँ जैसे जनसंचार के सभी माध्यमों का प्रयोग करती हैं। इस प्रकार राजनीतिक पार्टियाँ अपने समर्थन के लिए लोगों को शिक्षित तथा प्रभावित करती हैं । राजनीतिक पार्टियाँ जनमत निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ।
(iv) सरकार बनाना और चलाना : सरकार बनाना राजनीतिक पार्टी का प्रमुख कार्य तथा उद्देश्य है । संसदीय व्यवस्था में, सत्ता में दल का नेता प्रधानमंत्री बनता है तथा वह अपनी कैबिनेट में अन्य मंत्रियों को नियुक्त करता है।

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अर्थशास्त्र लघु उत्तरीय प्रश्न:-

प्रश्न 15. कोर बैंकिंग प्रणाली से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- आजकल प्लास्टिक के एक छोटे से टुकड़े पर इंगित यांत्रिकी चिह्न के माध्यम से पैसे का आदान-प्रदान तथा निकासी होने लगा है। जब व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान तक बिना विलम्ब के पैसे का लेनदेन करता है तो बैंक की इस प्रणाली को कोर बैंकिंग प्रणाली कहते हैं।

प्रश्न 16. आय से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- जब कोई व्यक्ति किसी प्रकार का शारीरिक अथवा मानसिक कार्य करता है और उस व्यक्ति को उसके कार्यों के बदले जो पारिश्रमिक मिलता है, उसे उस व्यक्ति की आय कहते हैं। आय वह मापदण्ड है जिसके द्वारा देश के आर्थिक विकास की स्थिति का आकलन किया जाता है। देश अथवा राज्य को उसकी आय के आधार पर ही विकसित अथवा विकासशील श्रेणी में रखा जाता है।

प्रश्न 17. सहकारिता की परिभाषा लिखें।
उत्तर- सहकारिता का अर्थ है “एक साथ मिलजुलकर कार्य करना” लेकिन अर्थशास्त्र में इस शब्द का प्रयोग अधिक व्यापक अर्थ में किया जाता है । “सहकारिता वह संगठन है जिसके द्वारा दो या दो से अधिक व्यक्ति स्वेच्छापूर्वक मिलजुलकर, समान स्तर पर आर्थिक हितों की वृद्धि करते हैं। इस प्रकार सहकारिता उस आर्थिक व्यवस्था को कहते हैं जिसमें मनुष्य किसी आर्थिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए मिलजुलकर कार्य करते हैं।

प्रश्न 18. कुछ ऐसे कारकों की चर्चा करें जिससे उपभोक्ताओं का शोषण होता है?

उत्तर- उपभोक्ता-शोषण के मुख्य कारक निम्नलिखित हैं :
(i) मिलावट की समस्या-महँगी वस्तुओं में मिलावट करके उपभोक्ता का शोषण होता है।
(ii) कम तौल द्वारा-वस्तुओं के माप में हेरा-फेरी से भी उपभोक्ता का शोषण होता है।
(iii) कम गुणवत्ता वाली वस्तु-उपभोक्ता को धोखे से अच्छी वस्तु के स्थान पर कम गुणवत्ता वाली वस्तु देकर शोषण करना।
(iv) ऊँची कीमत द्वारा-ऊँची कीमत वसूल करके भी उपभोक्ता का शोषण किया जाता है।
(v) डुप्लीकेट वस्तुएँ-सही कंपनी का डुप्लीकेट वस्तुएँ प्रदान करके उपभोक्ता का शोषण होता है।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 19. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के क्या कारण हैं ?
उत्तर- बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के निम्नलिखित कारण हैं :

(i) तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या-बिहार में जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते विकास के लिए साधन कम हो जाते हैं। अधिकांश साधन जनसंख्या के भरण-पोषण में चला जाता है

(ii) आधारिक संरचना का अभाव-किसी भी देश या राज्य के विकास के लिए आधारिक संरचना का होना आवश्यक है । लेकिन बिहार इस मामले में काफी पीछे है। राज्य में सड़क, बिजली एवं सिंचाई का अभाव है। साथ ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाएँ भी कम हैं। इस वजह से बिहार में पिछड़ेपन की स्थिति कायम है।

(iii) कृषि पर निर्भरता-बिहार की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर निर्भर है। यहाँ की अधिकांश जनता कृषि पर ही निर्भर है।

(iv) बाढ़ तथा सूखा से क्षति-बिहार में, खासकर उत्तरी बिहार में नेपाल से आये जल से बाढ़ आती है। हर साल बाढ़ का आना लगभग तय है। इससे जान-माल की काफी क्षति होती है। हाल के कोसी का प्रलय इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। इसी तरह सूखे की मार दक्षिणी बिहार को झेलनी पड़ती है। इससे हमारे किसानों को अकाल जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।

(v) औद्योगिक पिछड़ापन-किसी भी देश या राज्य के लिए उद्योगों का विकास जरूरी होता है। यहाँ के सभी खनिज क्षेत्र एवं बड़े उद्योग तथा प्रतिष्ठित अभियांत्रिकी संस्थाएँ सभी झारखण्ड में चले गए। इस कारण बिहार में कार्यशील औद्योगिक इकाइयों की संख्या नगण्य रह गई है।

(vi) गरीबी-बिहार में गरीबी का भार सर्वाधिक है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत के आधे से भी कम है। इसके चलते भी बिहार पिछड़ा है।

(vii) खराब विधि-व्यवस्था-किसी भी देश या राज्य के लिए शांति तथा सुव्यवस्था जरूरी होती है। लेकिन बिहार में वर्षों से कानून-व्यवस्था कमजोर स्थिति में थी जिसके चलते उद्योग व निवेश को प्रोत्साहन नहीं मिल सका। इस खराब विधि-व्यवस्था के कारण बिहार एक पिछड़ा राज्य बन गया।

(viii) कुशल प्रशासन का अभाव-बिहार की प्रशासनिक स्थिति ऐसी हो गई है जिसमें पारदर्शिता का अभाव है। सारा प्रशासनिक तंत्र भ्रष्टाचार के दलदल में डूबा है जिसके कारण बिहार का विकास नहीं हो पा रहा है।

प्रश्न 20. वस्तु विनिमय प्रणाली की कठिनाइयों पर प्रकाश डालें।
उत्तर- वस्तु विनिमय प्रणाली की निम्नलिखित कठिनाइयाँ हैं :

(i) आवश्यकता के दोहरे संयोग का अभाव-आवश्यकता के दोहरे संयोग का मतलब है कि एक की जरूरत दूसरे से मेल खा जाए । जैसे गेहूँ के बदले चावल का खरीददार मौजूद हो । लेकिन ऐसा कभी संयोग ही होता था कि किसी की जरूरत किसी से मेल खा जाए । वस्तु विनिमय प्रणाली की यह महत्त्वपूर्ण कठिनाई थी।

(ii) मूल्य के सामान्य मापक का अभाव-वस्तु विनिमय प्रणाली की दूसरी बड़ी कठिनाई मूल्य के मापने से संबंधित थी। कोई ऐसा सर्वमान्य मापक नहीं था जिसकी सहायता से सभी प्रकार की वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को ठीक प्रकार से मापा जा सके । अर्थात् एक किलो चावल के बदले कितना दूध दिया जाए; आदि ।

(iii) संचय का अभाव-वस्तु विनिमय प्रणाली में लोगों के द्वारा उत्पादित वस्तुओं के संचय की असुविधा थी। व्यवहार में व्यक्ति कुछ ऐसी वस्तुओं का उत्पादन करता है जो शीघ्र नष्ट हो जाती है। ऐसी शीघ्र नष्ट होनेवाली वस्तुएँ मछली, फल, सब्जी इत्यादि का लंबी अवधि तक संचय करना कठिन था।

(iv) सह विभाजन का अभाव-कुछ वस्तुएँ ऐसी होती हैं जिनका विभाजन नहीं किया जा सकता है। यदि उनका विभाजन कर दिया जाए तो उनकी उपयोगिता नष्ट हो जाती है

(v) भविष्य के भुगतान की कठिनाई-वस्तु विनिमय प्रणाली में उधार लेने तथा देने में कठिनाई होती थी। इस प्रणाली में उधार देने वाले को घाटा होता था जबकि उधार लेने वाला फायदे में रहता था।

(vi) मूल्य हस्तांतरण की समस्या-वस्तु विनिमय प्रणाली में मूल्य के हस्तांतरण में कठिनाई होती थी। कठिनाई उस समय और अधिक बढ़ जाती थी जब कोई व्यक्ति एक स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर बसना चाहता । ऐसी स्थिति में उसे अपनी सम्पत्ति छोड़कर जाना पड़ता था क्योंकि उसे बेचना कठिन था।

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लघुउत्तरीय:-

प्रश्न 21. संसाधन को परिभाषित कीजिए ।

उत्तर-  उपयोग में आनेवाली सभी वस्तुएँ संसाधन कहलाती हैं । संसाधन भौतिक एवं जैविक दोनों हो सकते हैं। भूमि, मृदा, जल, खनिज जैसे विभिन्न भौतिक पदार्थ मानवीय आकांक्षाओं की पूर्ति में सहायक होकर संसाधन बन जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर वनस्पति, वन्य-जीव, जलीय-जीव आदि जैविक संसाधन हैं, जो मानवीय जीवन को सुखद बनाते हैं

प्रश्न 22. जल संसाधन के क्या उपयोग हैं ? लिखें।
उत्तर- जल की महत्ता को प्राचीन भारतीय ग्रंथ में ‘जल ही जीवन है’ कहकर निरूपित किया गया है। प्राणियों में 65 प्रतिशत तथा पौधों में 65-99 प्रतिशत जलीय अंश विद्यमान होता है। पेयजल, घरेलू कार्य, सिंचाई, उद्योग, हुआ । यहा जन स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा मल-मूत्र विसर्जन आदि कार्यों में जल संसाधन का उपयोग अपरिहार्य है। साथ ही विकास के अन्य रूपों-जल-विद्युत निर्माण, परमाणु संयंत्र-शीतलन, मत्स्य पालन, जलकृषि, वानिकी आदि में भी जल संसाधन के उपयोग होते हैं।

प्रश्न 23. खनिज क्या है ?
उत्तर- खनिज धात्विक एवं अधात्विक पदार्थों का संयोग है, जिसमें रासायनिक एवं भौतिक विशिष्टताएँ निहित होती हैं। ये निश्चित रासायनिक संयोजन एवं विशिष्ट आंतरिक परमाणविक संरचना वाले गुणों से युक्त होते हैं।

प्रश्न 24. मुम्बई हाई तेल उत्पादक क्षेत्र का परिचय दें।
उत्तर- मुम्बई हाई क्षेत्र मुम्बई तट से 176 किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में अरब सागर में स्थित है । यहाँ 1975 में तेल खोजने का कार्य शुरू समुद्र में सागर सम्राट नामक मंच बनाया गया है जो एक जलयान है और पानी के भीतर तेल के कुँए खोदने का कार्य करता है । यहाँ 80 करोड़ टन तेल के भण्डार का अनुमान है

प्रश्न 25. भारत के प्रमुख राष्ट्रीय जलमार्गों के बारे में लिखिए।
उत्तर- भारत के पाँच राष्ट्रीय जलमार्ग हैं:

(i) राष्ट्रीय जलमार्ग 1-इलाहाबाद से हल्दिया के बीच 1620 कि० मी० की लंबाई में है।

(ii) राष्ट्रीय जलमार्ग 2-सदिया से धुबरी के बीच 891 कि० मी० की लंबाई में ब्रह्मपुत्र नदी में विकसित है।

(iii) राष्ट्रीय जलमार्ग 3-कोलम से कोट्टापुरम के बीच 205 कि० मी० लंबा यह जलमार्ग चंपाकारा तथा उद्योगमंडल नहरों सहित पश्चिमी तट नहर में विकसित है।

(iv) राष्ट्रीय जलमार्ग 4-1095 कि० मी० में गोदावरी-कृष्णा के सहारे पुड्डुचेरी-काकीनाडा नहर के सहारे आंध्रप्रदेश,तमिलनाडु एवं पुड्डुचेरी में फैला है।

(v) राष्ट्रीय जलमार्ग 5-यह 623 कि० मी० की लंबाई में उड़ीसा राज्य में ईस्ट-कोस्ट केनाल, मताई नदी, ब्राह्मणी नदी एवं महानदी डेल्टा के सहारे विकसित की जा रही है।

प्रश्न 26. बिहार के अत्यधिक घनत्व वाले जिलों का नाम लिखिए।
उत्तर-बिहार राज्य में अत्यधिक घनत्व वाले जिले क्रमशः पटना, दरभंगा, वैशाली, बेगूसराय, सीतामढ़ी एवं सारन हैं। इन जिलों में जनसंख्या घनत्व औसतन 1200 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न:-

प्रश्न 27. विकास के स्तर के आधार पर संसाधनों का वर्गीकरण करें।
उत्तर- (i) संभावी संसाधन (Potential Resources) ये वे संसाधन हैं, जो किसी प्रदेश में विद्यमान होते हैं, परंतु इनका उपयोग नहीं किया गया है । उदाहरण के तौर पर भारत के पश्चिमी भाग, विशेषकर राजस्थान और गुजरात में पवन ऊर्जा और सौर ऊर्जा संसाधनों की अपार संभावनाएँ हैं, परन्तु इनका सही ढंग से विकास नहीं हुआ है ।

(ii) विकसित संसाधन (Developed Resources)-वे संसाधन जिनका सर्वेक्षण किया जा चुका है और उनके उपयोग की गुणवत्ता और मात्रा निर्धारित की जा चुकी है, विकसित संसाधन कहलाते हैं । संसाधनों का विकास प्रौद्योगिकी और उनकी सम्भाव्यता के स्तर पर निर्भर करता है । उदाहरण के लिए, भारत के पास कोयला संसाधनों के कुल 2,47,847 मिलियन टन भंडार हैं।

(iii) भंडार (Stock)-पर्यावरण में उपलब्ध वे पदार्थ जो मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं परंतु उपयुक्त प्रौद्योगिकी के अभाव में उसकी पहुंच से बाहर हैं; भंडार में शामिल हैं । उदाहरण के लिए जल दो ज्वलनशील गैसों, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का यौगिक है तथा यह ऊर्जा का मुख्य स्रोत बन सकता है । परंतु इस उद्देश्य से इनका प्रयोग करने के लिए हमारे पास आवश्यक तकनीकी ज्ञान नहीं है ।

(iv) संचित कोष-यह संसाधन भंडार का ही हिस्सा है, जिन्हें उपलब्ध तकनीकी की सहायता से प्रयोग में लाया जा सकता है परंतु भावी पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इनके प्रयोग को अभी स्थगित कर दिया गया है । उदाहरण के लिए भारत के पास वर्तमान पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में वन हैं, परंतु भावी पीढ़ियों के लिए उन्हें सुरक्षित रखा गया है।

प्रश्न 28. भारत में सूती वस्त्र उद्योग के वितरण का वर्णन करें।
उत्तर- सूती वस्त्र उद्योग एक कृषि उत्पाद आधारित उद्योग है, जो कपास पर निर्भर है, जिसमें उद्योगों की स्थापना के सामान्य कारक के अतिरिक्त जलवायु जैसी कारक भी स्थानापन्न प्रमुख कारक हैं। क्योंकि आर्द्र जलवायु सूत की लंबाई एवं सुन्दरता के नियामक हैं। भारत में सूती-वस्त्र उद्योग का एक लंबा इतिहास रहा है।

       अविभाजित भारत में ढाका का मलमल विश्व में विख्यात था। 1818 ई० में कोलकाताके निकट फोर्ट ग्लास्टर में प्रथम सूती-वस्त्र उद्योग लगाये गए थे। पर, यह सफल नहीं हो सकी । पुनः 1854 ई० में मुम्बई में काबसजी-नानाभाई डाबर द्वारा एक सफल उद्योग की स्थापना हुई जिसने भारतीय सूती वस्त्र उद्योग को आधार प्रदान किया।

        आज भारत के सबसे विशाल उद्योग के रूप में सूती वस्त्र उद्योग को जाना जाता है । यह देश का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदान करने वाला उद्योग है। वर्तमान में देश के औद्योगिक उत्पादन में इस उद्योग का 14 % योगदान है। जबकि देश के कुल GDP का 4% सहयोग सूती-वस्त्र उद्योग से प्राप्त होता है । विदेशी आय के कुल आय का 17 प्रतिशत (2006-07) इसी उद्योग के कारण है।

           आज भारत में सूती वस्त्र की लगभग 1600 मिलें हैं। 80 प्रतिशत मिलें निजी क्षेत्र में स्थापित हैं प्रमुख सूती वस्त्र उत्पादक राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, प० बंगाल, उ० प्रदेश, तमिलनाडु प्रमुख हैं। इस उद्योग का राष्ट्रव्यापी विकेन्द्रीकरण हुआ है। यहाँ से सं० रा०, अमेरिका, इंगलैण्ड, रूस, फ्रांस, यूरोप के पूर्वी देश सहित नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका एवं अफ्रीकी देशों को सूती वस्त्र निर्यात किया जाता है।

Matric Social Science vvi Subjective Question 2022 BSEB

लघुउत्तरीय:-

प्रश्न 29. आपदा प्रबंधन की आवश्यकता क्यों है ?
उत्तर- आपदा प्रबंधन की आवश्यकता आपदा के पूर्व एवं पश्चात् होने वाली क्षति को कम करने या बचने से है। प्राकृतिक आपदा या मानवनिर्मित आपदा इत्यादि के घटित होने से अधिक मात्रा में जैविक एवं अजैविक संसाधनों का नुकसान होता है। इसी संदर्भ में लोगों को विशेष प्रशिक्षण देकर इसके प्रभाव को कम करना, आपदा प्रबंधन कहलाता है।

प्रश्न 30. सुनामी के प्रमुख लक्षण लिखिए ।
उत्तर- (i) उत्तरदायी कारक-भूकंपों, भूस्खलनों, ज्वालामुखी विस्फोटों, ब्रह्मांडीय तत्त्वों, जैसे उल्का पिण्डों के प्रभाव के कारण सुनामी पैदा हो सकती है

(ii) लहरों की अधिक लंबाई तथा तेज गति-एक सुनामी की लहरों
की लंबाई 100 कि०मी० से अधिक तथा गति 50 कि०मी० प्रति घंटा से अधिक हो सकती है।

(iii) लहरों का सिलसिला-सुनामी में लहरों का सिलसिला होता है । अधिकतर पहली लहर सबसे बड़ी नहीं होती । पहली लहर आने के बाद परवर्ती सुनामी लहरों से खतरा कई घंटों तक बना रहता है ।

(iv) अत्यधिक शक्ति-कुछ सुनामी लहरों की शक्ति बहुत अधिक होती है । ये सुनामी लहरें कई टन भारी चट्टानों, नावें तथा अन्य मलबा अनेक मीटर पानी के अंदर ले जाती हैं । घर तथा अन्य इमारतें नष्ट हो जाती हैं । सभी तैरते हुए पदार्थ तथा पानी बहुत शक्ति के साथ बहता है तथा लोगों को जख्मी कर या मौत के घाट उतार सकता है ।

प्रश्न 31. आपदा के संदर्भ में तलाश तथा बचाव क्रियाओं का वर्णन करें।
उत्तर- यह विशेष रूप से प्रशिक्षित लोगों के समूह अथवा किसी एक व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत तकनीकी क्रिया है, जो संकटकालीन स्थितियों में उन घायलों की देखभाल तथा बचाव करते हैं, जहाँ जीवन को खतरा होता है । तलाश तथा बचाव के उपाय समुदाय के पूर्ण सहयोग तथा टीम भावना से ही संभव हो पाते हैं।

प्रश्न 32. प्राकृतिक आपदा में उपयोग होने वाले किसी एक वैकल्पिक संचार माध्यम की चर्चा कीजिए
उत्तर  -प्राकृतिक आपदा में उपयोग होने वाले वैकल्पिक संचार माध्यमों में रेडियो संचार प्रमुख है । रेडियो संचार में इलेक्ट्रो मैग्नेटिक तरंग होते हैं जो एक स्थान से दूसरे स्थानों पर सूचना भेजने का कार्य करते हैं। रेडियो संचार
में विभिन्न दूरी के अनुसार फ्रीक्वेंसी को सेट करते हैं तथा सूचना प्राप्त करते हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में यह संचार-व्यवस्था प्रमुख हो जाती है।

Bihar Board Matric Social Science Model Paper 2022

 S.N Bihar Board Class 10th Model Paper 2022
 1  Scienceविज्ञान
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 3 Social Science सामाजिक विज्ञान
 4 Math गणित 
5  Sanskrit संस्कृत
 6 English अंग्रेजी 
7 Non Hindi अहिन्दी 
8 Urdu उर्दू 

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