Matric Social science Subjective Question 2022

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Bihar Board Matric Social Science Subjective Question 2022

प्रश्न 1. गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें।
उत्तर- गैरीबाल्डी ने अपने कर्मचारियों तथा स्वयंसेवकों की सशस्त्र सेना बनायी। उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किए। इन रियासतों की अधिकांश जनता बू| राजवंश के निरंकुश शासन से तंग होकर गैरीबाल्डी की समर्थक बन गयी। गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ की सत्ता संभाली ।

     दक्षिणी इटली के जीते गए क्षेत्रों को बिना किसी संधि के गैरीबाल्डी ने विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया। वह अपनी सारी सम्पत्ति राष्ट्र को समर्पित कर साधारण किसान की भाँति जीवन जीने की ओर अग्रसर हुआ । इटली के एकीकरण में गैरीबाल्डी का महत्त्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 2. पाण्डुलिपि क्या है ? इसकी क्या उपयोगिता है ?
उत्तर- भारत में छापाखाना के विकास के पहले हाथ से लिखकर पाण्डुलिपियों को तैयार करने की पुरानी और समृद्ध परम्परा थी । यहाँ संस्कृत, अरबी एवं फारसी साहित्य की अनेकानेक तस्वीरयुक्त सुलेखन कला से परिपूर्ण साहित्यों की रचनाएँ होती रहती थीं। इन्हें मजबूती प्रदान करने के लिए सजिल्द भी किया जाता था। फिर भी पाण्डुलिपियाँ काफी नाजुक और महंगी होती थीं। पाण्डुलिपियों की बनावट कठिन होने एवं प्रचुरता से उपलब्ध नहीं होने के कारण यह आम जनता के पहुँच से बाहर थी।

प्रश्न 3. रासायनिक हथियारों एवं एजेंट ऑरेंज का वर्णन करें।
उत्तर- रासायनिक हथियार-नापाम-यह एक तरह का आर्गेनिक कम्पाउण्ड है जो अग्नि बमों में गैसोलिन के साथ मिलकर एक ऐसा मिश्रण तैयार करता था जो त्वचा से चिपक जाता और जलता रहता था। इसका व्यापक पैमाने पर वियतनाम में प्रयोग किया गया था। रासायनिक हथियार एजेंट ऑरेंज का भी अमरीकी सैनिकों द्वारा वियतनाम युद्ध में इस्तेमाल किया गया। यह एक ऐसा जहर था जिससे पेड़ों की पत्तियाँ तुरत झुलस जाती थीं एवं पेड़ मर जाते थे। जंग को खत्म करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता था । इनका इस्तेमाल जंगलों के साथ-साथ खेतों और आबादी दोनों पर जमकर किया गया। इस जहर का असर आज भी वहाँ की आबादी में नजर आता है, जन्मजात विकलांगता और कैंसर के रूप में ।
 

प्रश्न 4. जतरा भगत के बारे में आप क्या जानते हैं ? संक्षेप में बताएँ।
उत्तर- अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों (छोटानागपुर क्षेत्र के उराँव) ने 1914 ई० से 1918 ई० के बीच विद्रोह किया जिसका नेता जतरा भगत था। इस आंदोलन में सामाजिक एवं शैक्षणिक सुधार पर विशेष बल दिया गया, जिसमें परमेश्वरवाद पर बल तथा मांस, मदिरा और आदिवासी नृत्यों से दूर रहने की बात कही गई।

प्रश्न 5. साइमन कमीशन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर  भारत में संवैधानिक सुधार के मुद्दे पर विचार करने हेतु 1919 के भारत अधिनियम में यह व्यवस्था की गई कि 10 वर्ष के बाद एक आयोग नियुक्त किया जाएगा । यह आयोग अधिनियम में परिवर्तन पर विचार करेगा । सर जॉन साइमन के नेतृत्व में 1927 को साइमन कमीशन बना । जिस सात सदस्यीय आयोग का गठन किया गया उसमें एक भी भारतीय नहीं था । भारत के स्वशासन के संबंध में निर्णय विदेशियों द्वारा किया जाना था । फलतः 3 फरवरी 1928 को बम्बई पहुँचने पर साइमन कमीशन का पूरे भारत में विरोध हुआ और जनता संघर्षरत हो गई ।

प्रश्न 6. आर्थिक तथा प्रशासनिक संदर्भ में ग्रामीण तथा नगरीय बनावट के दो प्रमुख आधार क्या हैं ?
उत्तर- आर्थिक तथा प्रशासनिक संदर्भ में ग्रामीण तथा नगरीय व्यवस्था के दो प्रमुख आधार हैं-(i) जनसंख्या का घनत्व तथा (ii) कृषि आधारित आर्थिक क्रियाओं का अनुपात । शहरों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है जबकि कृषि आधारित आर्थिक क्रियाओं का अनुपात गाँवों में अधिक होता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 7. 1929 ई० के आर्थिक संकट के कारण और परिणाम को स्पष्ट करें।

उत्तर- 1929 ई० के आर्थिक संकट का बुनियादी कारण स्वयं इस अर्थव्यवस्था के स्वरूप में निहित था। प्रथम विश्वयुद्ध के चार वर्षों में यूरोप को छोड़कर बाजार आधारित अर्थव्यवस्था का विस्तार होता चला गया। उसके लाभ बढ़ते चले गए दूसरी ओर अधिकांश लोग गरीबी और अभाव में पिसते रहे । नवीन तकनीकी प्रगति तथा बढ़ते हुए मुनाफे के कारण उत्पादन में जो भारी वृद्धि हुई उससे ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई कि जो कुछ उत्पादित किया जाता था

      उसे खरीद सकने वाले लोग बहुत कम थे। कृषि क्षेत्र में अति उत्पादन की समस्या बनी हुई थी। इससे कृषि उत्पादों की कीमतें कम हो गईं। गिरती कीमतों से किसानों की आय घटी, अतः इस स्थिति से निकलने के लिए उन्होंने उत्पादन को और बढ़ाया जिससे कीमतें और नीचे गिर गईं। कृषि उत्पाद पड़ी-पड़ी सड़ने लगी। अर्थशास्त्री काउलिफ ने अपनी पुस्तक “दि कॉमर्स ऑफ नेशन” में लिखा है कि विश्व के सभी भागों में कृषि उत्पादन एवं खाद्यान्न के मूल्य की विकृति 1929-32 ई० के आर्थिक संकट के मूल कारण थे।

         1920 ई० के दशक के मध्य में बहुत सारे देशों ने अमेरिका से कर्ज लेकर अपनी युद्ध से तबाह हो चुके अर्थव्यवस्था को नये सिरे से विकसित करने का प्रयास किया । जब स्थिति अच्छी थी तब तक अमेरिकी पूँजीपतियों ने यूरोप को कर्ज दिए लेकिन अमेरिका की घरेलू स्थिति में संकट के कुछ संकेत मिलने के साथ ही वे लोग कर्ज माँगने लगे। इससे यूरोप के सभी देशों के समक्ष गहरा संकट आ खड़ा हुआ। इस परिस्थिति में यूरोप के कई बैंक डूब गए । महत्त्वपूर्ण देशों की मुद्रा-मूल्य गिर गई । अमेरिका में संकट के लक्षण देखते ही उसने संरक्षणात्मक उपाए करने आरंभ किए। आयातित वस्तुओं पर उन्होंने दो गुणा सीमा शुल्क लगा दिया, साथ ही आयात की मात्रा भी सीमित किया। इस संकुचित आर्थिक राष्ट्रवाद ने विश्व व्यापार के बाजार आधारित अर्थव्यवस्था की कमर ही तोड़ दी।

           आर्थिक मंदी में अमेरिका के बाजारों में शुरू हुआ सट्टेबाजी की प्रवृत्ति भी निर्णायक रही। इस मंदी का बुरा प्रभाव अमेरिका को ही झेलना पड़ा । मंदी के कारण बैंकों ने लोगों को कर्ज देना बंद कर दिया और दिए हुए कर्ज की वसूली तेज कर दी। किसान अपनी उपज को बेच नहीं पाने के कारण तबाह हो गए। कर्ज की कमी से कारोबार ठप्प पड़ गया। बैंकों ने लोगों के सामानों, मकान, कार, जरूरी चीजों को कुर्क कर लिया। लोग सड़क पर आ गए ।

        कारोबार ठप्प पड़ने से बेरोजगारी बढ़ी । कर्ज की वसूली नहीं होने से बैंक बर्बाद हो गए एवं कई कंपनियाँ बंद हो गईं। 1933 ई० तक 4000 से ज्यादा बैंक बंद हो चुके थे और लगभग 110000 कंपनियाँ चौपट हो गई थीं। अन्य देशों पर होने वाले आर्थिक प्रभावों में जर्मनी और ब्रिटेन इस आर्थिक मंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ ।

       महामंदी ने भारतीय व्यापार को भी प्रभावित किया। 1928-1934 ई० के बीच देश का आयात-निर्यात घटकर लगभग आधा रह गई। कृषि उत्पाद की कीमत काफी गिर गई, जिससे भारतीय किसान काफी प्रभावित हुए । सरकार की तरफ से किसानों को कोई रियायत नहीं दी गई। इस मंदी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को आरंभ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 8. नई आर्थिक नीति क्या है ?
उत्तर- लेनिन ने 1921 ई० में एक नई नीति की घोषणा की जिसमें मार्क्सवाद के मूल्यों से कुछ हद तक समझौता करना पड़ा । नई आर्थिक नीति में निम्नलिखित प्रमुख बातें थीं :
(i) किसानों से अनाज लेने के स्थान पर एक निश्चित कर लगाया गया । बचा हुआ अनाज किसान का था, वह उसका मनचाहा इस्तेमाल कर सकता था।
(ii) यद्यपि यह सिद्धान्त में कायम रखा गया कि जमीन राज्य की है फिर भी व्यवहार में जमीन किसान की हो गई।
(iii) 20 से कम कर्मचारियों वाले उद्योगों को व्यक्तिगत रूप से चलाने का अधिकार मिल गया ।
(iv) उद्योगों का विकेन्द्रीकरण किया गया ।
(v) विभिन्न स्तरों पर बैंकों की स्थापना की गई।
(vi) विदेशी पूँजी भी सीमित तौर पर आमंत्रित की गई ।
(vii) व्यक्तिगत सम्पत्ति और जीवन की बीमा भी राजकीय एजेंसी द्वारा शुरू किया गया।
(viii) ट्रेड यूनियन की अनिवार्य सदस्यता समाप्त कर दी गई। नई आर्थिक नीति के द्वारा लेनिन ने उत्पादन की कमी को नियंत्रित किया। इसके परिणामस्वरूप कृषि एवं औद्योगिक उत्पादन में आशातीत वृद्धि हुई।

राजनीति विज्ञान लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 9. किन्हीं दो प्रावधानों का जिक्र करें जो भारत को धर्मनिरपेक्ष देश बनाते हैं ?
उत्तर- हमारे संविधान में धर्मनिरपेक्ष समाज की स्थापना हेतु निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं
(i) भारत में किसी भी धर्म को राजकीय धर्म के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। श्रीलंका में बौद्ध धर्म, पाकिस्तान में इस्लाम और ब्रिटेन में ईसाई धर्म को राजकीय धर्म का दर्जा दिया गया है किंतु भारत का संविधान किसी धर्म को विशेष दर्जा नहीं देता है।
(ii) संविधान में हर नागरिक को यह स्वतंत्रता दी गई है कि अपने विश्वास से वह किसी भी धर्म को अंगीकार कर सकता है। इस आधार पर उसे किसी अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता है।

प्रश्न 10. लोकतंत्र में विरोधी पक्ष की भूमिका का उल्लेख करें ।
उत्तर- चुनाव हारने वाले दल, जो सरकार बनाने में असफल रहते हैं, विरोधी पक्ष की भूमिका निभाते हैं तथा वे सरकार के कामकाज, नीतियों एवं असफलताओं की आलोचना करने का महत्त्वपूर्ण कार्य करते हैं । वे तानाशाही सत्ता को अपनाने से सरकार को रोकते हैं । विरोधी दल सदन में कुछ विधियों का प्रयोग करते हैं, जैसे-अविश्वास प्रस्ताव और ध्यानाकर्षण ।
विधायिका से बाहर भी वे सरकार की संगठित आलोचना जारी रखते हैं । विरोधी पक्षों का काम विरोध करना, पोल खोलना तथा सत्ता से उतारना माना जाता है । इस प्रकार उनका उद्देश्य देश में एक बेहतर शासन सुनिश्चित करना होता है।

प्रश्न 11. पंचायती राज के उद्देश्यों का उल्लेख करें ।

उत्तर- पंचायती राज के मुख्य उद्देश्य हैं : (i) ग्रामीण क्षेत्र की स्थानीय संस्थाओं को वास्तविक शक्तियाँ सौंपकर
लोकतंत्र का आधार मजबूत करना ।
(ii) स्थानीय मामलों के कार्यों में ग्रामीणों की अधिक साझेदारी सुनिश्चित करना ।
(iii) ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध मानव संसाधनों तथा अन्य संसाधनों का सही प्रयोग करना ।
(iv) ग्रामीणों के बीच आत्मनिर्भरता एवं सामुदायिक भावना को विकसित करना ।
(v) ग्रामीण क्षेत्र में सामुदायिक विकास योजनाओं को मूर्त रूप देना ।
(vi) ग्रामीण क्षेत्र के कमजोर वर्ग के लोगों को भी मुख्यधारा से जोड़ना, अर्थात ग्रामीण विकास योजनाओं में हाथ बँटाने का अवसर देना ।

प्रश्न 12. बिहार में हुए छात्र आंदोलन के प्रमुख कारण क्या थे ?
उत्तर- 1971-72 ई० के बाद के वर्षों में देश की सामाजिक-आर्थिक दशा में कोई सुधार नहीं हुआ था। बांग्लादेश से आये शरणार्थियों के चलते अर्थव्यवस्था और लड़खड़ा गयी। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि ने भारत की आर्थिक स्थिति को असंतुलित कर दिया । 1972-73 ई० में मानसून की असफलता के चलते पूरे देश में कृषि की पैदावार में काफी कमी आयी। परिणामस्वरूप पूरे देश में असंतोष का माहौल था। मार्च 1974 ई० में प्रदेश में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार एवं खाद्यान्न की कमी तथा कीमतों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि के चलते बिहार के छात्रों ने सरकार के
विरुद्ध आंदोलन छेड़ दिया। बिहार के छात्रों ने अपने आंदोलन की अगुआई के लिए जयप्रकाश नारायण को आमंत्रित किया ।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 13. जीवन के विभिन्न पहलुओं का जिक्र करें जिसमें भारत में स्त्रियों के साथ भेदभाव है या वे कमजोर स्थिति में हैं।
उत्तर- लैंगिक विभेद पर आधारित सामाजिक विभाजन सार्वजनिक क्षेत्र एवं निजी क्षेत्र दोनों में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है। लड़के और लड़कियों के पालन-पोषण के क्रम में ही परिवार में यह भावना घर कर जाती है कि भविष्य में लड़कियों की मुख्य जिम्मेवारी गृहस्थी चलाने और बच्चों का पालन-पोषण तक ही सीमित होती है। और, उसकी पुष्टि श्रम के लैंगिक
विभाजन से हो जाती है। यह प्रवृत्ति कमोबेश सभी परिवारों में देखी जा सकती है।

     महिलाओं का कार्यक्षेत्र घर के अंदर तक ही सीमित रहता है। उनका काम खाना बनाना, कपड़ा साफ करना, सिलाई-कढ़ाई करना और बच्चे का पालन-पोषण आदि है । पुरुष भी इन कार्यों को भलीभाँति कर सकता है। परंतु पुरुष वर्ग के दिमाग में यह विचारधारा घर बना चुका है कि औरत का जन्म इन घरेलू कार्यों को ही पूरा करने के लिए हुआ है । हमारा समाज अभी भी पितृ-प्रधान है। औरतों के साथ आज भी कई तरह के भेदभाव होते हैं। इस बात का संकेत निम्नांकित तथ्यों से मिलता है : 

(i) महिलाओं में साक्षरता की दर अब भी मात्र 54 प्रतिशत है जबकि पुरुषों में 76 प्रतिशत । यद्यपि स्कूली शिक्षा में कई जगह लड़कियाँ अव्वल रही हैं फिर भी उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली लड़कियों का प्रतिशत बहुत ही । 

(ii) शिक्षा में लड़कियों के इसी पिछड़ेपन के कारण अब भी ऊँचे तनख्वाह वाले और ऊँचे पदों पर पहुँचने वाली महिलाओं की संख्या बहुत ही कम है।

(iii) यद्यपि एक सर्वेक्षण के अनुसार एक औरत औसतन रोजाना साढ़े सात घंटे से ज्यादा काम करती है जबकि एक मर्द औसतन रोज छः घंटे ही काम करता है। फिर भी पुरुषों द्वारा किया गया काम ही ज्यादा दिखाई पड़ता
है। क्योंकि उससे आमदनी होती है।
(iv) लैंगिक पूर्वाग्रह का काला पक्ष बड़ा दुखदायी है जब भारत के अनेक हिस्से में माँ-बाप को सिर्फ लड़के की चाह होती है। लड़की को जन्म लेने से पहले हत्या कर देने की प्रवृत्ति इसी मानसिकता का परिणाम है।

प्रश्न 14. भारत में लोकतंत्र कैसे सफल हो सकता है ?
उत्तर- भारत में लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है कि सर्वप्रथम जनता शिक्षित हो । शिक्षा ही उनके भीतर जागरूकता पैदा कर सकती है । यह सच्चाई है कि लोकतांत्रिक सरकारें बहुमत के आधार पर बनती हैं किंतु लोकतंत्र का अर्थ बहुमत की राय से चलने वाली व्यवस्था नहीं है बल्कि यहाँ अल्पमत की आकांक्षाओं पर ध्यान देना आवश्यक है। भारतीय लोकतंत्र की सफलता के लिए यह आवश्यक है

     कि सरकारें प्रत्येक नागरिक को यह अवसर अवश्य प्रदान करें  ताकि वे किसी न किसी अवसर पर बहुमत का हिस्सा बन सकें। लोकतंत्र की सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि  व्यक्ति के साथ-साथ विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं के अंदर आंतरिक लोकतंत्र हो । विडंबना है कि भारतवर्ष में नागरिकों के स्तर पर और खासतौर पर राजनीतिक दलों के अंदर आंतरिक विमर्श अथवा आंतरिक लोकतंत्र की स्वस्थ परम्परा का अभाव है। जाहिर है कि इसके दुष्परिणाम के तौर पर सत्ताधारी लोगों के चरित्र एवं व्यवहार गैर लोकतांत्रिक दिखेंगे और लोकतंत्र के प्रति हमारे विश्वास में कमी होगी ।

    इसे हम अपनी सक्रिय भागीदारी एवं लोकतंत्र में अटूट विश्वास से दूर  कर सकते हैं।

अर्थशास्त्र लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 15. मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है ?
उत्तर- मिश्रित अर्थव्यवस्था पूँजीवादी तथा समाजवादी अर्थव्यवस्था का मिश्रण है। मिश्रित अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जहाँ उत्पादन के साधनों का स्वामित्व सरकार तथा निजी व्यक्तियों दोनों के पास होता है। भारत एक मिश्रित अर्थव्यवस्था वाला देश है। यह अर्थव्यवस्था पूँजीवाद एवं समाजवाद के बीच का रास्ता है। (It is a mid way between capitalism and socialism.)

प्रश्न 16. मार्शल द्वारा दी गई राष्ट्रीय आय की परिभाषा दें।
उत्तर- मार्शल के अनुसार, “किसी देश की श्रम एवं पूँजी का उसके प्राकृतिक साधनों का प्रयोग करने से प्रतिवर्ष भौतिक तथा अभौतिक वस्तुओं पर विभिन्न प्रकार की सेवाओं का जो शुद्ध समूह उत्पन्न होता है उसे राष्ट्रीय आय कहते हैं।”

प्रश्न 17. मौद्रिक प्रणाली क्या है ?
उत्तर- मौद्रिक प्रणाली में विनिमय का सारा कार्य मुद्रा की सहायता से होता है। इस प्रणाली में पहले कोई व्यक्ति अपनी वस्तु या सेवा को बेचकर मुद्रा प्राप्त करता है और फिर उस मुद्रा से अपनी जरूरत की अन्य वस्तुएँ प्राप्त करता है। चूंकि इस प्रणाली में मुद्रा, विनिमय के माध्यम का कार्य करती है। इसलिए इसे मौद्रिक विनिमय प्रणाली कहा जाता है।

प्रश्न 18. आप किसी खाद्य पदार्थ संबंधी वस्तुओं को खरीदते समय कौन-कौन सी मुख्य बातों का ध्यान रखेंगे? बिन्दुवार उल्लेख करें।
उत्तर- किसी खाद्य पदार्थ संबंधी वस्तुओं को खरीदते समय हम निम्न बातों का ध्यान रखेंगे :
(i) अवयवों की सूची (ii) वजन या परिमाण (iii) निर्माता का नाम व पता (iv) निर्माण की तिथि (v) इस्तेमाल की समाप्ति (vi) निरामिष/सामिष चिह्न (vii) डाले गए रंग और खुशबू की घोषणा (viii) पोषाहार का दावा-सम्मिलित पौष्टिक तत्त्वों की मात्राएँ (ix) स्वास्थ्य के प्रति हानिकारक चेतावनी (x) वैधानिक चेतावनी ।

दीर्घ उत्तरीय

प्रश्न 19. बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के उपायों का वर्णन करें।
उत्तर- बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं :
(i) जनसंख्या पर नियंत्रण-राज्य में तेजी से बढ़ती हुए जनसंख्या को नियंत्रित कर आर्थिक विकास को प्रोत्साहित किया जा सकता है। इसके लिए परिवार नियोजन कार्यक्रम को अपनाया जाए। इसके लिए राज्य में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को शिक्षित किया जाए।

(ii) कृषि में तेजी से विस्तार-बिहार में कृषि ही जीवन का आधार है। अतः कृषि में नए यंत्रों का प्रयोग किया जाए । उत्तम खाद, उत्तम बीज, का प्रयोग किया जाए ताकि उपज में वृद्धि लायी जा सके।
(iii) बाढ़ पर नियंत्रण-बिहार के विकास में बाढ़ एक बहुत बड़ा बाधक है। इससे जान-माल की काफी क्षति होती है। बाढ़ नियंत्रण के लिए नेपाल सरकार से वार्ता कर उचित कदम उठाने की जरूरत है। जल के प्रबंधन के द्वारा सिंचाई व बिजली जैसी सुविधाओं का पर्याप्त विकास किया जा सकता है।
(iv) आधारिक संरचना का विकास-बिहार में आधारिक संरचना, यथा-बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग आदि की कमी है। इन क्षेत्रों आर्थिक विकास को त्वरित किया जा सकता है।
(v) उद्योगों का विकास-बिहार से झारखण्ड के अलग होने से यह राज्य लगभग उद्योग विहीन हो गया था। मुख्यतः चीनी मिलें, बिहार के हिस्से में रह गई थीं जो अधिकतर बंद पड़ी हैं। लेकिन विगत वर्षों में निवेश को प्रोत्साहित करने के कदम उठाये जा रहे हैं।
(vi) गरीबी दूर करना-बिहार में गरीबी का सबसे अधिक प्रभाव है। गरीबी रेखा के नीचे लगभग 42 प्रतिशत से अधिक लोग यहाँ जीवन बसर कर रहे हैं। इसके लिए रोजगार की व्यवस्था की जाए। स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाए । में पर्याप्त सुधार
(vii) शांति व्यवस्था की स्थापना-बिहार में शांति का माहौल कायम कर निवेशकों में विश्वास जगाया जा सकता है तथा आर्थिक विकास की गति को तीव्र किया जा सकता है।
(viii) स्वच्छ तथा ईमानदार प्रशासन-बिहार के आर्थिक विकास के लिए स्वच्छ, कुशल तथा ईमानदार प्रशासन आवश्यक है।
(ix) केन्द्र से अधिक मात्रा में संसाधनों का हस्तांतरण-बिहार के विकास के लिए केन्द्र से अधिक मात्रा में संसाधनों के हस्तान्तरण की आवश्यकता है । कुछ राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देकर उन्हें अधिक मात्रा में केन्द्रीय सहायता दी जाती है। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए जिससे राज्य को अधिक वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके जिसका उपयोग राज्य के विकास के लिए किया जा सकता है।

प्रश्न 20. मुद्रा के कार्यों पर प्रकाश डालें।
उत्तर- आधुनिक समय में मुद्रा बहुत सारे कार्यों को सम्पन्न करती है। मुद्रा के निम्नलिखित कार्य हैं
(i) विनिमय का माध्यम
(ii) मूल्य का मापक
(iii) विलंबित भुगतान का मान
(iv) मूल्य का संचय
(v) क्रय-शक्ति का हस्तांतरण तथा
(vi) साख का आधार । मुख्यतः मुद्रा के चार कार्य हैं-मुद्रा के इन चार कार्यों को प्रायः अंग्रेजी की एक कविता द्वारा निम्न प्रकार से व्यक्त किया जाता है : Money is a matter of function four,ma medium, a measure, a standard, a store. अर्थात्-मुद्रा के हैं चार कार्य महान-माध्यम, मापन, संचय, भुगतान ।
(i) विनिमय का माध्यम-मुद्रा विनिमय का एक माध्यम है । क्रय तथा विक्रय दोनों में ही मुद्रा मध्यस्थ का कार्य करती है। मुद्रा के आविष्कार के कारण अब आवश्यकताओं के दोहरे संयोग के अभाव की कठिनाई उत्पन्न नहीं होती । अब वस्तु या सेवा को बेचकर मुद्रा प्राप्त की जाती है तथा मुद्रा से अपनी जरूरत की अन्य वस्तुएँ खरीदी जाती हैं। इस तरह मुद्रा ने विनिमय के कार्य को बहत ही आसान बना दिया है।
(ii) मूल्य का मापक-मुद्रा मूल्य का मापक है । मुद्रा के द्वारा वस्तुओं का मूल्यांकन करना सरल हो गया है। किस वस्तु का कितना मूल्य होगा, मुद्रा द्वारा यह पता लगाना सरल हो गया है।
(iii) विलंबित भुगतान का मान-आधुनिक युग में बहुत से आर्थिक कार्य उधार पर होता है और उसका भुगतान बाद में किया जाता है। अर्थात् भुगतान विलंबित या स्थगित होता है । मुद्रा विलंबित भुगतान का एक सरल
साधन है।
(iv) मूल्य का संचय-मनुष्य भविष्य के लिए कुछ बचाकर रखना चाहता है । वर्तमान आवश्यकताओं के साथ ही साथ भविष्य की आवश्यकताएँ भी महत्त्वपूर्ण हैं । मुद्रा में यह गुण है कि इसे संचित या जमा करके रखा जा सकता है।
(v) क्रय-शक्ति का हस्तांतरण-मुद्रा का एक आवश्यक कार्य क्रयशक्ति का हस्तांतरण भी है। मुद्रा में सामान्य स्वीकृति का गुण है। अतः कोई भी व्यक्ति किसी एक स्थान पर अपनी सम्पत्ति बेचकर किसी अन्य स्थान पर नयी संपत्ति खरीद सकता है । मुद्रा के माध्यम से क्रयशक्ति को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकता है
(vi) साख का आधार-वर्तमान समय में मुद्रा साख के आधार पर कार्य करती है। मुद्रा के कारण ही साख पत्रों का प्रयोग बड़े पैमाने पर होता है

भूगोल लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 21. जैव तथा अजैव संसाधन क्या हैं ? कुछ उदाहरण दें।
उत्तर-  जैव  संसाधन -“वे सभी संसाधन, जिनकी प्राप्ति जीवमंडल से होती है और जिनमें जीवन व्याप्त है, जैव संसाधन कहलाते हैं ।” जैव संसाधन हैं-वन, प्राणिजात आदि ।

(ख) अजैव-“वे सभी संसाधन जो निर्जीव वस्तुओं से बने हैं, अजैव संसाधन कहलाते हैं।” अजैव संसाधन नवीकरण योग्य तथा अनवीकरण योग्य दोनों होते हैं । भूमि तथा जल नवीकरण योग्य अजैव संसाधन हैं जबकि लोहा तथा बॉक्साइट अनवीकरण योग्य अजैव संसाधन हैं।

प्रश्न 22. बहुउद्देश्यीय परियोजना से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- विकास की ऐसी परियोजना, जिसमें विकास के कई उद्देश्यों की साथ-साथ पूर्ति हो सके, बहुउद्देश्यीय परियोजना कही जाती है। आजादी के बाद देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नदी-घाटी परियोजनाओं पर बल दिया गया। इस परियोजना के विकास के कई उद्देश्य हैं-बाढ़ नियंत्रण, मृदा अपरदन पर रोक, सिंचाई एवं पीने योग्य जल की आपूर्ति, विद्युत उत्पादन, उद्योगों को जलापूर्ति, मत्स्य-पालन, वन्य जीव संरक्षण, पर्यटन, परिवहन आदि ।

प्रश्न 23. खनिजों का क्या महत्त्व है ?
उत्तर- खनिज हमारे जीवन अथवा अर्थव्यवस्था के लिए एक अनिवार्य अंग हैं, क्योंकि
(i) हर चीज जो हम इस्तेमाल करते हैं एक छोटी सूई से लेकर एक बड़ी इमारत तक, या फिर एक बड़ा जहाज आदि सभी खनिजों से बने हैं ।
(ii) खनिजों के निर्यात से देश विदेशी मुद्रा अर्जित करता है
(iii) खनिजों के खनन से लोगों को रोजगार मिलता है ।
(iv) कोयला तथा पेट्रोलियम जैसे खनिज ऊर्जा के प्रमुख स्रोत हैं ।

प्रश्न 24. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को उदाहरण सहित वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर- स्वामित्व के आधार पर उद्योगों को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है-
(a) सार्वजनिक उद्योग-इसका संचालन सरकार स्वयं करती है। जैसे-दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला स्थित लौह-इस्पात उद्योग।
(b) संयुक्त अथवा सहकारी उद्योग-ऐसे उद्योगों में दो या दो से अधिक व्यक्तियों या सहकारी समितियों का योगदान होता है। जैसे-ऑयल इंडिया लिमिटेड, महाराष्ट्र के चीनी उद्योग, अमूल उद्योग (गुजरात) आदि ।

प्रश्न 25. बिहार में धान की फसल के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करें।
उत्तर- बिहार में धान की फसल के लिए भौगोलिक दशाएँ :
(i) ऊष्णार्द्र जलवायु ।
(ii) तापमान-22°-32°C के बीच ।
(iii) वर्षा-150-300 cm (iv) मिट्टी-जलोढ़, चिकनी
(v) बोआई- -जून से अगस्त, कटाई-सितंबर से नवम्बर ।

प्रश्न 26. बिहार में अत्यन्त कम घनत्व वाले जिले कौन-कौन हैं ?
उत्तर- बिहार राज्य में अत्यन्त कम घनत्व वाले जिले क्रमशः पश्चिमी चम्पारण, बाँका, जमुई एवं कैमूर हैं। इन जिलों में जनसंख्या घनत्व प्रायः 600 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर से भी कम पाया जाता

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 27. भारत में सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग का विवरण दीजिए।

उत्तर- सूचना-प्रौद्योगिकी उद्योग का संबंध ज्ञान से है । अतः इस उद्योग को ज्ञानाधारित उद्योग भी कहा जाता है। यह उद्योग एक प्रकार का फुटलूज उद्योग है जो कहीं भी लगाये जा सकते हैं। किसी भी उद्योग के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विशिष्ट नवीन ज्ञान, उच्च प्रौद्योगिकी, अनवरत शोध-अनुसंधान की आवश्यकता है। इन सभी वांछित आवश्यकता की पूर्ति सूचना-प्रौद्योगिकी से हो सकती है।

      इस प्रौद्योगिकी के आने से देश के आर्थिक ढाँचे एवं लोगों के जीवन पद्धति में काफी विकास हुआ है। इस उद्योग के अंदर आने वाले उत्पाद ट्रांजिस्टर, टेलिविजन, टेलीफोन, पेजर, रडार, सेल्यूलर टेलीकाम, लेजर, जैसे-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष उपकरण, कम्प्यूटर की सामग्रियाँ हैं। भारत में दूसरे प्रमुख उत्पादकों में बंगलौर, मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद, पूणे, चेन्नई, कोलकाता, कानपुर, लखनऊ आदि प्रमुख हैं।

       इस उद्योग के विकास से कई सूचना-प्रौद्योगिकी पार्क की स्थापना हो चुकी है। जो एकल विंडो एवं उच्च-आंकड़े संचार जैसी सुविधाएँ प्रदान कर रही हैं। इससे रोजगार का भी सृजन हुआ है।

प्रश्न 28. समोच्च रेखा क्या है ? इसके द्वारा विभिन्न प्रकार केढालों का प्रदर्शन किस प्रकार किया जाता है ?
उत्तर- समोच्च रेखा भूतल पर समुद्रतल से एक समान ऊँचाई को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाएँ होती हैं। इस विधि को उच्चावच प्रदर्शन का सर्वश्रेष्ठ विधि माना जाता है। वास्तविक सर्वेक्षण के आधार पर इन रेखाओं को बादामी रंग से खींचा जाता है। प्रत्येक रेखा के मान को भी अंकित कर दिया जाता है।

      विभिन्न प्रकार के उच्चावच को प्रदर्शित करने के लिए समोच्च रेखाओं के खींचने या बनाने का प्रारूप भिन्न-भिन्न होता है। एक समान ढाल को दिखाने के लिए समान दूरी पर रेखाएँ खींची जाती हैं। खड़ी ढाल को दिखाने के लिए समोच्च रेखाएँ पास-पास बनायी जाती हैं। इसके विपरीत मंद ढाल को दिखाने के लिए इन रेखाओं को दूर-दूर बनाया जाता है।

       सीढ़ीनुमा ढाल के लिए समोच्च रेखाएँ अंतराल पर परन्तु, दो या तीन रेखाएँ एक साथ जोड़ में बनाई जाती हैं। इसी तरह अन्य अनेक भू-आकृतियों को समोच्च रेखाओं से प्रदर्शित किया जा सकता है
आपदा प्रबंधन लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 29. आपदा से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- प्रकृति में घटित होने वाली वैसी प्राकृतिक या मानवनिर्मित घटनाएँ जिनके घटित होने के फलस्वरूप अधिक संख्या में मानव, की मृत्यु एवं प्राकृतिक संसाधनों का नुकसान हो, आपदा कहलाता है। जैसे-भूकंप, बाढ़, सूखा, आतंकवाद इत्यादि ।

प्रश्न 30. भूकंप के कारण सुनामी कैसे पैदा होती हैं ?
उत्तर- 1. समुद्र के नीचे जब भी भूकंप आता है तो उस क्षेत्र का जल अपनी सम अवस्था से विस्थापित हो जाता है ।
2. समुद्र तल में विस्फोट पानी को ऊपर धकेलता है जिससे लहरें उत्पन्न होती हैं।
3. ये लहरें 500 कि.मी. प्रति घंटा की गति से सागर की गहराई में तेजी से बहती हैं।
4. जैसे ही ये लहरें तट के पास पहुँचती हैं तो इनकी गति कम हो जाती है परंतु इनकी ऊँचाई बढ़ जाती है ।
5. सुनामी तट पर बहुत अधिक शक्ति से पहुँचता है तथा मार्ग में आने वाली हर वस्तु को नष्ट कर देता है ।

प्रश्न 31. जीवन-रक्षक आकस्मिक प्रबंधन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- आपदा के प्रारंभ होते ही प्रभावित लोगों को आपदा से निजात दिलाने के उद्देश्य से किए जाने वाले कार्य जीवन-रक्षक आकस्मिक प्रबंधन कहलाता है। इसके अंतर्गत सहायता पहुँचाने हेतु आमलोगों की एकजुटता
अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है जिसके कारण प्रभावित लोगों के जीवन बचाने का कार्य किया जाता है।

प्रश्न 32. सुखाड़ में मिट्टी की नमी को बनाए रखने के लिए आप क्या करेंगे?
उत्तर- सुखाड़ में मिट्टी की नमी को बनाये रखने के लिए घास का आवरण रहने देना चाहिए साथ ही खेतों की गहरी जुताई किया जाना चाहिए, जिससे मृदा में नमी बनी रहे ।

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 S.N Bihar Board Class 10th Model Paper 2022
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