हिरोशिमा Class 10th Hindi Subjective Question 2022 | Bihar Board Class 10th Subjective Question 2022 |

हिरोशिमा Class 10th Hindi Subjective Question 2022 | Bihar Board Class 10th Subjective Question 2022 |

हिरोशिमा

कवि- परिचय-प्रयोगवादी कविता के सूत्रधार अज्ञेय जी का जन्म उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, (कसया) में सन् 1911 में हुआ था। ये मूल निवासी करतारपुर, पंजाब के थे। इनकी माता का नाम व्यंती देवी तथा पिता का नाम हीरानंद शास्त्री था। इनके पिता प्रख्यात पुरातत्ववेत्ता थे। अज्ञेयजी ने प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ में, मैट्रिक पंजाब विश्वविद्यालय से, इंटर मद्रास से तथा एम. ए. लाहौर से किया। इनका देहान्त 1987 ई. में हआ।

प्रश्न 1. कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलनेवाला सूरज क्या है? वह कैसे निकलता है?

उत्तर- कविता के प्रथम अनुच्छेद में निकलनेवाला सूरज मानव-निर्मित विनाशकारी अणु बम (आणविक आयुध) है। जब इसे कहीं गिराया जाता है तब इससे विनाशकारी किरणे उत्सर्जित होती हैं। ये ही किरणें विस्फोट के बाद निकलती हैं और जीव-जन्तु, पेड़-पौधे को जलाकर राख बना देती हैं।

प्रश्न 2. छायाएँ दिशाहीन सब ओर क्यों पड़ती हैं ? स्पष्ट करें।

उत्तर- छायाएँ दिशाहीन सब ओर इसलिए पड़ती हैं, क्योंकि सूरज नहीं उगा था। सूरज के उगने पर जब प्रकाश फैलता है, तब उगे हुए सूरज की विपरीत दिशा में छाया बनती है। लेकिन यह सूरज तो मानव-निर्मित बम था, जो गिराया गया था। गिरने के बाद विस्पट हुआ और सारा शहर उस प्रकाश में डूब गया। इसी कारण छाया नहीं बन पाई। छाय तो तब बनती है जब किसी निश्चित दिशा से प्रकाश आता है। लेकिन यह प्रकाश स्वयं दिशाहीन था। इसलिए छाया भी दिशाहीन थी।

प्रश्न 3. प्रज्वलित क्षण की दोपहरी से कवि का आशय क्या है ?

उत्तर- प्रज्वलित क्षण की दोपहरी से कवि का यह आशय है कि सुबह के समय जब बम गिराया गया, उसी समय दोपहर के समान सम्पूर्ण शहर प्रकाशमय हो गया और जीव-जन्तु आदि उसमें धू-धू कर जलने लगे। किन्तु कुछ ही क्षणों में यह विनाशलीला खत्म हो गई, क्योंकि सब कुछ राख बन चुकी थी। अतः कवि ने बम विस्फोट के क्षण को दोपहरी कहा है, क्योंकि एक निश्चित क्षण में ही शहर उजड़ गया तथा चमकता प्रकाश विलीन हो गया।

प्रश्न 4. मनुष्य की छायाएँ कहाँ और क्यों पड़ी हुई हैं ?

उत्तर- मनुष्य की छायाएँ हिरोशिमा शहर में पड़ी हुई हैं जहाँ अमेरिका ने बम बरसाकर अपनी क्रूरता का परिचय दिया था। मनुष्य की छायाएँ इसलिए पड़ी हुई हैं क्योंकि विनाशक तत्व की प्रचंड गर्मी एवं तेज में मानव-शरीर मोम के समान पिघल कर भाप बन गया, जिसकी छाया पत्थरों एवं सीमेंट निर्मित धरातल पर बन गई। यह वैज्ञानिक सच है कि जब कोई पदार्थ द्रव रूप में परिवर्तित होता है तब वहाँ उसकी आकृति छाया के समान बन जाती है जो अवशेष के रूप में दीर्घकाल तक उस घटना के बारे में सबूत पेश करती है।

प्रश्न 5. हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है?

उत्तर- हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में पत्थर पर लिखी हुई मानव की  जली हुई छाया है। कवि कहता है कि झुलसे पत्थरों एवं सीमेंट निर्मित धरातल पर बनी छाया दुर्दात मानवीय विभीषिका की कहानी कहती है। यह दुर्घटना अतीत की भीषणतम विनाशलीला का सबूत है। इससे पता चलता है कि यह बसा-बसाया शहर एकदिन अमेरिका की क्रूरता का शिकार हुआ था। इसने मानव-जाति पर प्रश्न-चिह्न खड़ा कर दिया था कि जब मानवीय मूल्य में ह्रास होता है तब मानवता का लोप हो जाता है, जैसा कि 1945 ई. में अमेरिका ने अपनी धाक जमाने के लिए हिरोशिमा पर बम गिराकर नृशंसता का सबूत पेश किया, जिसका स्मरण कर मनुष्य आज भी सिहर उठता है। 

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