जनतंत्र का जन्म | Class 10th Hindi Subjective Question 2022 | Bihar Board Class 10th Subjective Question 2022

जनतंत्र का जन्म | Class 10th Hindi Subjective Question 2022 | Bihar Board Class 10th Subjective Question 2022

जनतंत्र का जन्म

कवि परिचय-  ओज एवं पौरुष के कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म सन् 1908 में बिहार प्रांत के मुंगेर (वर्तमान बेगुसराय) जिले के सिमरिया गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। दिनकर जी दो वर्ष के थे, उसी समय इनके पिता का देहान्त हो गया। माँ की ममता के आँचल में पले-बढ़े दिनकर जी ने स्थानीय पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात् 1932 ई. में पटना विश्वविद्यालय से बी. ए. (ऑनर्स) की परीक्षा पास की। शिक्षा समाप्ति के पश्चात् वे मोकामा घाट हाईस्कूल में अध्यापन कार्य करने लगे। इन्होंने बिहार सरकार के सब-रजिस्ट्रार, युद्ध प्रचार विभाग के अधिकारी तथा उपनिदेशक, मुजफ्फरपुर लंगट सिंह कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष तथा राज्यसभा सदस्य के रूप में विविध सेवाएँ की। 1964 ई. में उन्हें भागलपुरविश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्हें भारत सरकार के हिंदी सलाहकार के पद पर सुशोभित किया गया। इस महान यशस्वी विभूति का निधन सन् 1974 में हुआ।

प्रश्न 1. कवि की दृष्टि में समय के रथ का घर्घर-नाद क्या है ? स्पष्ट करें।

उत्तर- कवि की दृष्टि में समय के रथ का घर्घर-नाद भारत में जनतंत्र के उदय का जयघोष है। सदियों की देशी-विदेशी पराधीनता के बाद स्वतंत्रता की प्राप्ति हुई है और जनतंत्र को प्राण-प्रतिष्ठा की गई है। तात्पर्य कि शासन पर वैसे लोगों को अधिकार दिया गया, जो सदियों से उपेक्षित, पीड़ित तथा शोषित थे। अर्थात् शासन पर जनमत का आधार हो गया है।

प्रश्न 2. कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन किस रूप में करता है?

उत्तर –कविता के आरंभ में कवि ने भारतीय जनता की दयनीय दशा का वर्णन किया है  कवि ने इन्हें मिट्टी की अबोध मूर्ति कहकर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि ये लोग अनेक प्रकार की शारीरिक-मानसिक यातनाओं को सहते हुए मौन रहते थे। वे अपनी पीड़ा किसी के समक्ष प्रकट करने में पूर्ण असमर्थ थे। उनका जीवन नारकीय था। वे शोषित-पीड़ित तथा उपेक्षित थे। उनमें इतनी शक्ति नहीं थी कि वे मन की पीड़ा मुँह खोल प्रकट कर सकें।

प्रश्न 3. कवि के अनुसार किन लोगों की दृष्टि में जनता फूल या दुधमुंही बच्ची की तरह है और क्यों ? कवि क्या कहकर उनका प्रतिवाद करता है ?

उत्तर- कवि के अनुसार सत्ताभोगियों दी दृष्टि में जनता फूल-सी दूधमुंही बच्ची\ की तरह है, क्योंकि उनकी सोच है कि जनता भोली भाली होती है, उसे सत्ता की जानकारी नहीं होती। वह परिश्रम करना तथा पेट भरना जानती है। ऐसी स्थिति में उन्हें कुछ देकर या कुछ आश्वासन देकर स्वार्थ सिद्ध किया जा सकता है। ‘साम दाम दंड भेद’ का प्रयोगकर जनता को चुप रखा जा सकता है, क्योंकि गरीब जनता कष्ट-सहिष्णु एवं धैर्यवान होती है, वह अपनी विवशता के कारण संयम में रहना चाहती है, लेकिन कवि इस तर्क के विरुद्ध अपना विचार प्रकट करता है कि जब जनता असलियत को जान जाती है तब वह विरोध में उठ खड़ी होती है, तब सत्ता का सिंहासन हिल उठता है। भयानक तूफान आ जाता है। इन निरीहों के क्रोध की ज्वाला इतनी प्रखर होती है कि सत्ताधारियों की सारी शक्ति जलकर राख बन जाती है। अतः कवि के कहन का आशय है कि समूह के समक्ष महान-से-महान शक्ति मूल्यहीन हो जाता है। इसीलिए एक अंग्रेजी कवि ने कहा है-“चींटी भी जब संगठित हो जाती हैं तो शेर की खाल उतार सकती हैं।”

प्रश्न 4. कवि जनता के स्वज का चित्र किस तरह खींचता है?

उत्तर- कवि जनता के अजय स्वप्न का चित्र खींचता है, जिसमें जनतंत्र के उदय का जयघोष है। कवि का कहना है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जब जनतांत्रिक शासन पद्धति की स्थापना होगी तो शासन की शक्ति जनता में निहित हो जाएगी। जनता अपना शासन स्वयं करेगी। जनतंत्र जनमत आधारित होता है। इस पद्धति में हर व्यक्ति की शासन में साझेदारी होती है। अतः जब कोई प्रतिनिधि सरकार जनता के हित की उपेक्षा करती है तो जनता अपने मत का प्रयोग करके उसे सत्ताच्युत कर देती है। तात्पर्य यह कि जनतांत्रिक पद्धति में सत्ता की असली शक्ति जनता के हाथ होती है।

प्रश्न 5. विराट जनतंत्र का स्वरूप क्या है ? कवि किनके सिर पर मुकुट धरने की बात करता है और क्यों?

उत्तर- विराट जनतंत्र का स्वरूप नवीन भारत है। भारत विश्व का सबसे बड़ा जनतंत्र है। जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। इतने बड़े देश की ऋसन-शक्ति जनता में निहित है। इस पद्धति में जनता अपना मत देकर अपने प्रतिधि का चुनाव करती है। यही चयनित प्रतिनिधि सरकार का गठन कर शासन करते हैं। कवि प्रजा के सिर पर मुकुट धरने की बात इसलिए कहता है क्योंकि इस व्यवस्था में देश की जनता की समान रूप से शासन में साझेदारी होती है। साथ ही इससे हर व्यक्ति को अपनी बात कहने का अधिकार प्राप्त होता है। इस कथन के माध्यम से कवि यह भी बताना चाहता है कि जनतांत्रिक पद्धति आने से जनता संप्रभु हो जाती है और कोई सरकार जनता की उपेक्षा नहीं कर पाती। साथ ही, समाज में भाईचारे एवं राष्ट्रीयता की भावना बढ़ती है। सभी समान रूप में देश-हित की बात सोचते हैं।

प्रश्न 6. कवि की दृष्टि में आज के देवता कौन हैं और वे कहाँ मिलेंगे?

उत्तर-  कवि की दृष्टि में आज के देवता सड़कों, खेतो, खलिहानों तथा कारखानों में काम करने वाले मेहनतकश हैं, जिनके प्रयास से देश का आर्थिक विकास होता है। नेता, अधिकारी या पदाधिकारी इन्हीं की मेहनत पर निर्भर करते हैं। कवि का मानना है  कि कोई तभी समृद्ध हो सकता है जब उसके पास विशाल जनशक्ति होती है। तात्पर्य कि मजदूर एवं किसान ही देश की रीढ़ हैं। इसलिए कवि इन्हें देवता कहता है।

प्रश्न 7. कविता का मूल भाव क्या है ? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- कविता का मूल भाव जनतंत्र की स्थापना है। कवि इस शासन पद्धति के माध्यम से शोषक-शोषित के भेद को मिटाना चाहता है। क्योंकि इस व्यवस्था में शासन करने की शक्ति जनता के हाथ आ जाती है। फलतः सत्ता की मनमानी बन्द हो जाती  है। इसमें संविधान द्वारा कुछ शक्तियाँ जनता को प्रदान की जाती है। इन शक्तियों का उपयोग जनता समान रूप में करती है। तात्पर्य कि जनता स्वयं ही सिंहासन पर आरूढ़ होती है और समान रूप में सबको कमाने, जीवन जीने तथा अपनी समस्या प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। नीच-ऊँच, शोषित-शोषक, गरीब-अमीर सबकी शासन में भागेदारी होती

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